Fans of Ilm-e-deen

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07/01/2025

*لکھتا ہے وہی ہر بشر کی تقدیر*
*وَالـلّٰـہُ عَـلٰی کُـلِّ شَـیْـئٍ قَـدِیْــرٌ*

*جس کے تابع ہیں جنّات و انسان*
*فَـبِــأَيِّ آلَاء رَبِّــكُــمَــا تُــكَــذِّبَــانِ*

*ابــتــدا ہے وہـی اور وہـی انــتــہــاء*
*وَتُـعِـزُّ مـن تـشـاء وَتُـذِلُّ مـن تـشـاء*

*‏تنہائی میں بھی رہو گناہ سے دور*
*ﻭَﺍﻟــﻠَّــﻪُ ﻋَــﻠِــﻴــﻢٌ ﺑِـﺬَﺍﺕِ ﺍﻟــﺼُّــﺪُﻭﺭِ*

*ہے تجھکو بس طلب کی جوت*
*کُــلُّ نَــفْــسٍ ذَائــقــة الْــمَــوْتِ*

*انساں کو ہے لاحاصل کا جنون*
*قَـــدۡ أَفۡـــلَـــحَ ٱلۡـــمُـــؤۡمِـــنُـــونَ*

*غیب سے نکال دیتا ہے وہ سبیل*
*حَـسْـبُـنَـا الـلَّـهُ وَنِــعْــمَ الْـوَكِـيـلُ*

*ہر ایک کو دیتا ہے صلہ بہترین*
*إِنَّ الـــلَّـــهَ مَـــعَ الــصَّــابِــرِيــنَ*

*اس سے مانگو وہ ہے بڑا کریم*
*فَـــاِنَّ الــلّٰــهَ غَــفُــوْرٌ رَّحِــیْــمٌ*

*تخلیقِ انسانی کا ہے مقصد*
*قُــــلْ هُــــوَ الـــلّٰـــهُ اَحَــــدٌ*

*تـیـری رضـا میں ہی ہے سـکـون*
*فَـإِنَّـمَـا يَـقُـولُ لَـهُ كُـن فَـيَـكُـونُ*

12/05/2024

*नया लिब्रल फ़ितना*
आज कल कुछ दानीश-वर लोग बड़े ज़ोर शोर से चिल्ला कर रहे है ……
काबा के गिर्द घूमने से पहले किसी गरीब के घर घूम लेना ।
मस्जिद को क़ालीन देने से पहले किसी भूखे को रोटी दे देना ।
हज उमराह पर जाने से फले किसी गरीब के बेटी की रूखसती का खर्चा उठा लो।
तब्लीग़ में निकलने से बेहतर है किसी लाचार को दावा फ़राहम करदो ।
मस्जिद में सीमेंट की बोरी देने से अफ़ज़ल है कि बेवा/विधवा के घर आटे की बोरी देदो ।

*लेकिन याद रखो*
* दो अच्छे कामों का इस तरह तुलना करना कोई दीनी ख़िदमत या इंसानी हमदर्दी नहीं, बल्कि सरासर ज़हालत है।

*अगर तुलना ही करना है तो दीन और दुनिया के बीच करो और ऐसा कहो!*

15, 20 लाख की गाड़ी, तब लेना जब मोहल्लें में कोई भूखा न सो रहा हो।

50, 60 हजार का मोबाइल फोन तब लें जब मोहल्लें में कोई भीख माँगने वाला न हो।
हर कमरे में AC उस वक़्त लगवाओ जब गर्मी में बग़ैर बिजली और पंखे के सोने वाला कोई ना हो ।
बरांडेड और महँगे कपड़े उस वक़्त ख़रीदो जब सड़क पर फटे कपड़े पहनने वाला कोई ना हो ।

लाखों की गाड़ियाँ, लाखों के मोबाइल फोन और हजारों के खिलौने खरीदते वक़्त इन दानीश-वरो और खुद को अकलमंद समझने वालो को, गरीब, लाचार और बेसहारे लोगों की याद क्यों नहीं आती?

आख़िर यह सब चिड़ काबा, मस्जिद, हज और उमरा और तबलीग़ के बारे में क्यों है?

इन ज़रूरियात का फ़राएज़ से तुलना करके और दीनी फराएज़ से गफ़लत का दर्स देने वाले जब अपनी शादियों पर ग़ैर ज़रूरी खर्च करते है ,गाना बजाना करते है, लंबी लंबी गाड़िया लेकर बारात पर जाते है, बिला ज़रूरत तमाम ख़र्चे करते है, तो उन्हें यह याद क्यों नहीं रहता कि वो ये फ़िज़ूल खर्ची के बजाए किसी गरीब की मदत करदे या एक इदारा बना कर हर वक़्त उस इदारे के ज़रिये ज़रूरतमंदो तक मदत पहुचाँए, गरीब बेटी की निकाह में ताऊन करे।
हजारों, लाखों की आराम दाह चीजें खरीदते वक़्त उन्हें किसी गरीब की बिन ब्याही बेटिया क्यों नहीं नज़र आती? उन्हें किसी भूखे की भूख क्यु नज़र नही आती? किसी लाचार की लाचारी क्यु नही नज़र आती?

एक बार ज़रूर सोचना चाहिए!
क्या इंसानियत के लिए ग़ैर ज़रूरी चीजों का तर्क करना बेहतर है या फ़राएज़ का तर्क करना?

इस तरह के तर्क देने वाली नसल ही Ex-Muslim बन जाते है, जो इस वक़्त उभर रहे है

अगर मुनासिब समझे तो इस पोस्ट को शेयर करे ताकि इस फितना अन्दाज़ से तमाम मुलसलमान महफ़ूज़ रहे ।
यह हमारे लिए एक दीनी और सामाजिक ज़िम्मेदारी है कि इस तरह के लोगो कि फितनी बाते दूसरो तक भी पहुँचाए ताकि वो लोग भी अपने दीन और दुनिया दोनों को महफ़ूज़ रखे।

11/05/2024

इस वक़्त समाज के बिगाड़ की बुनियाद का सबब वालिदैन की गफलत है, कि उन्होंने इस्लाम की कद्रो किमत को न खुद समझा और न औलाद के दिलों मे इस्लाम की मोहब्बत और गैरत उतारने मे कामयाब हुए बल्कि वह अपनी निगरानी मे बच्चों को कार्टून और ड्रामे दिखाते है, जवानी मे दुनिया के हाथ से निकल जाने और लोगो पर जुल्म करने वालो से डरना सिखाते है लेकिन याद रहे ज़ालिम के ज़ुल्म करने पर चुप रहने वाला भी उतना है ज़ालिम है जितना कि ज़ुल्म करने वाला |

भला ऐसे लोग भी दीन के काम आ सकते है ।

कहने का मतलब है अपने बच्चो को दीन की हीफाजत करने वाला बनाये, ज़ुल्म की गर्दानो को दबोचने वाला बनाये और अल्लाह के हुक्म पर अमल करने वाला बनाये
जब दुनिया की तालीम दीन और इस्लाम से दूर करने लगे तो बेहतर है जाहिल रहना
अल्लाह की कसम ऐसे तालीम से जाहिल रहना बेहतर है जो दुनिया की चमकती हुई ट्रॉफियो को हासिल करने के लिए हमे हमारे दीन से दूर रहने के लिए मजबूर करदे, माडर्नाइज़ैश के नाम पर वेस्टर्न कल्चर को अपने उपर थोप ले और दुनिया जहान की तमाम बुराइयों मे अपने आप को मुब्तिला करले। न्यू जनरेशन के नाम पर, दुनिया के साथ कंधा से कंधा मिलाने के नाम पर खुद को और अपने आने वाली नसलो को बर्बाद करदे, अगर कंधा ही मिलाना है तो मिलाओ अल्लाह के रसूल और उनके साथियों से उनके सहाबीयो से क्यु नही मिलाते, जिन्होंने दुनिया के अंधेरो मे आकर दुनिया को रास्ता दिखाया उस वक़्त जा बच्चियों को ज़िंदा दफन किया जाता था, जब दुनिया के लोग अपने रब को भूल कर काबा के अंदर 360 बुतो को रखकर अपना अलग अलग खुदा बना बैठे थे।
उस वक़्त अंधेरे मे एक रोशनी की तरह *मुह़म्मद इब्न अब्दुल्लाह अल हाशिम* आखरी पैगंबर *हज़रत मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम* आये, और हमे पैदा होने से लेकर मौत के बाद तक की जिंदगी सिखाया, अल्लाह के कलाम को हम तक पहुंचाया ।

याद रहे, अल्लाह ने इल्म को फ़र्ज किया है दीन को समझने के लिए ताकि कोई तुमको दीन से भटका न सके जैसा की पहले भी पैगंबर आये और दीन को उस ज़माने के लोगो तक पहूचा कर चले गए और जाने के बाद वो ग़फिल हो गये

अगर कोई इल्म हमे अल्लाह और उसके रसूल से दूर करदे तो वो इल्म नही एक फितना है फितना

https://www.instagram.com/fansofilmedeen/

11/05/2024

*हमारे लिए अहम है आज कल के महोल को देखते हुए*

हम ख़ुद बेटियों और बहनों को बराबरी के नाम पर आगे करते और ख़ुद को मुशक़्क़त में डालते है ताकि हमारी बिटिया या बहेन समाज में एक नाम रौशन कर सके लेकिन याद रहे *हज़रते फ़ातिमा रज़ीअल्लाह अंहा* जैसी बना कर भी नाम रौशन किया जा सकता है
कहने का मतलब ये है कि, बेशक आप अपने खून पसीने की मेहनत से लड़कियों को खूब पढ़ाये, उन्हें दुनिया जहान की तमाम डिग्रिया दिलाये। लेकिन उनका ख़याल भी रखे उनके ऊपर अपनी सरपरस्ती भी क़ायम रखे नाकि लावारिस की तरह उन्हें छोड़ दे| जहां मर्ज़ी हो जाने दे जब मर्ज़ी हो आने दे और आप ये हरगिज़ ना सोचे मेरी ये बाते सिर्फ़ आपकी लड़कियों के लिए है। ये आप के बच्चो के लिए है
और जब आप के बच्चे स्कूल, कॉलेज, युनिवर्सिटी, में जाते है तो वो अल्हमदुलील्लाह वो एक ऐसी उम्र में पहुँच जाते है जहां पर उनके अंदर एक जज़्बात पैदा हो जाते है और ये जज़्बात कब और कैसे जाकर किसी से टकरा जाते है उसको ख़ुद नहीं मालूम होता उस वक़्त वो सामने वाले का जाति या धर्म नहीं पूछता फिर वो हर दिन बुराइया करते है लेकिन घर वालों को ख़बर नहीं होती कुछ को खबर भी होती है तो नज़र अन्दाज़ करते है और जब ये बुराइया समाज में ज़ाहिर हो जाती है तो अपने आप को कोसता है जबकि अब कोई फ़ायदा नहीं | गुज़रा हुआ दिन कभी वापस नहीं आता फिर वो किसी लव ट्रैप में फसे या फेक ट्रैप में कोई फ़ायदा नहीं ।
इसके उदाहरण उत्तर प्रदेश, बिहार, हैदराबाद जैसी जगह पर देखने को मिल जाएगा

बेशक तुम्हारा माल और औलाद एक फितना है *क़ुरान 64:15*

आपकी इन दोनों पर नज़र होनी चाहिए । पुरज़ोर कोशिश हो कि ये दोनों सही जगह पर खर्च किए जाए नाकि अंधा भरोसा क़ायम किया जाए इन फितनो पर
उम्मीद है कि आप अपनी औलादों पर अपनी सरपरस्ती क़ायम रखेंगें नाकि उनको लावारिश की तरह उनके हाल पर छोड़ देंगे

Photos from Fans of Ilm-e-deen's post 24/10/2023

24/03/2023

May Allah bless you this Ramadan and remind you: "Happy now the Believers, who humble themselves in their prayer, and who keep aloof from vain words, and who are doers of alms-deeds, and who restrain their appetites.

*RAMADAN KAREEM*

19/03/2023

19/03/2023

30/09/2022

Nikah ko aam Karo. Zina khud ruk jayega

24/04/2020

اللَّهُمَّ أَهِلَّهُ علَيْنَا بِالأَمْنِ والإِيمَانِ وَالسَّلامَةِ والإِسْلامِ ، رَبّي ورَبُّكَ اللَّه ، هلال رشد وخير
〘 *Allah is the greatest. O Allah, let the crescent loom above us in safety, faith, peace, and Islam, and in agreement with all that You love and pleases You. Our Lord and your Lord is Allah* 〙

〘 ऐ अल्लाह हम पर इस चाँद को, ईमान, सलामती और इस्लाम के साथ तुलु फरमा (ऐ चाँद!) मेरा और तुम्हारा रब अल्लाह ही है।〙

16/12/2017
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