अगर देश का प्रधानमंत्री पढ़ा-लिखा होना चाहिए, तो उसका चुनाव कैसे होगा?
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अरविंद केजरीवाल ने पुनः मांग की कि भारत को एक शिक्षित प्रधानमंत्री की आवश्यकता है।
तब से मेरे मन में रह रहकर विचार आ रहा है कि शिक्षित होने की परिभाषा क्या है?
क्या अरविंद केजरीवाल पढ़े-लिखे माने जाएंगे या उनके बैच का टॉपर पढ़ा-लिखा माना जाएगा? या फिर वह उमर शेख से जो लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स में पढ़ा था और जिसने अमरीकी पत्रकार डेनियल पर्ल की गर्दन रेतकर पाकिस्तान में हत्या कर दी थी। या फिर 19 आतंकवादियों को जिन्होंने वर्ल्ड ट्रेड सेंटर पर हमला किया था। वह सब या तो इंजीनियर थे या फिर पायलट। अल क़ाएदा का नेता अल-ज़वाहिरी डॉक्टर था।
थोड़ा और आगे बढ़ते हैं। शिक्षित होने की न्यूनतम योग्यता क्या है? पांचवी पास? हाई स्कूल? ग्रेजुएट या पोस्ट-ग्रेजुएट? अगर एक कैंडिडेट IIT चेन्नई की डिग्री लेकर आया है, दूसरा सुल्तानपुर के कमला नेहरू प्रौद्योगिकी संस्थान से - तो किसे प्रधानमंत्री पद के लिए उचित माना जाएगा। क्या संस्कृत के स्नाकोत्तर को AIIMS के MD से उच्च रखा जाएगा? क्या CA को इतिहास के स्नातक छात्र से कमतर आँका जाएगा? विधि के स्नातक को मनोविज्ञान के पोस्ट-ग्रेजुएट से बेहतर माना जाएगा? मैकेनिकल इंजीनियर एवं सॉफ्टवेयर इंजीनियर में से किसे बेहतर माना जाएगा? कृषि वैज्ञानिक को स्पेस वैज्ञानिक की तुलना में कहाँ रखेंगे? भोजन आवश्यक है या अंतरिक्ष में राकेट छोड़ना? क्या हृदय रोग विशेषज्ञ को अर्थशास्त्र के बारे में ज्ञान है? या फिर अर्थशास्त्री को हृदय की बाईपास सर्जरी के बारे में ज्ञान है? पशु रोग चिकित्सक को इंटरनेशनल डिप्लोमेसी के बारे में? या फिर अंतरराष्ट्रीय राजनीति में PhD वाले व्यक्ति को पशु चिकित्सा के बारे में ज्ञान है?
क्या कोरेस्पोंडेंस कोर्स या फिर ओपन यूनिवर्सिटी से पढ़ने वालो की डिग्री प्रधानमंत्री पद के लिए मान्य होगी? क्या विदेश में पढ़ा व्यक्ति, भारत में शिक्षित व्यक्ति से अधिक योग्य माना जाएगा?
अगर पढ़ा लिखा व्यक्ति प्रधानमंत्री होना चाहिए तो क्या यह नहीं होना चाहिए कि सभी पढ़े-लिखे लोग एक कंपटीशन दें और जो उसमें टॉप करें वह प्रधानमंत्री बने। लेकिन फिर व्यवस्था की सफलता के लिए यह भी आवश्यक है कि सारे विधायक और सांसद भी पढ़े लिखे हो। इससे तो लालू प्रसाद और उनके पुत्रों का टिकट ही कट जाएगा।
या फिर मुझे प्रधानमंत्री होना चाहिए जिसने इलाहाबाद विश्वविद्यालय, JNU और फ्रांस के टॉप संस्थान से पढ़ाई की है और एक अंतर्राष्ट्रीय संगठन में कार्य भी कर रहा हूं। लेकिन शशि थरूर का क्या होगा? उन्होंने PhD करी है और उसी संगठन में वह भी काम कर चुके हैं। लेकिन समस्या यह है कि अगर शशि थरूर को अपनी पढ़ाई के बल पे प्रधानमंत्री होना चाहिए, तो फिर राहुल गांधी का क्या होगा? वह तो शशि थरूर से कम पढ़े लिखे हैं। इस पूरे प्रकरण में सोनिया गांधी की महत्वाकांक्षा का क्या होगा? और फिर प्रियंका, वह कहां तक पढ़ी लिखी है? या फिर इंदिरा गांधी? मनमोहन सिंह कैंब्रिज में पढ़े लिखे होने के बाद भी सोनिया गांधी की जी हजूरी किया करते थे। और चिदंबरम हार्वर्ड में पढ़े होने के बाद भी क्या-क्या करतूतें कर बैठे? और फिर भगवंत मान और मनीष सिसोदिया क्या करेंगे?
और अगर प्रधानमंत्री के लिए कोई - अस्पष्ट सी - शिक्षित होने की योग्यता की मांग है, तो क्या मतदाता के लिए भी शिक्षित होने की योग्यता अनिवार्य कर देनी चाहिए? या फिर मतदाता अशिक्षित रह सकता है, लेकिन प्रधानमंत्री शिक्षित? क्या यह अभिजात वर्ग द्वारा अपना आधिपत्य जमाये रखने का सपना नहीं है?
और स्वयं IIT में पढ़े होने के बाद भी केजरीवाल के व्यवहार में जरा सी भी शालीनता नहीं है। हर विषय को बदतमीजी के साथ बेहुदे तरीके से बोलना। बात बात में देश के प्रधानमंत्री का मजाक उड़ाना और भाजपा के नेताओं से लिखित में माफी मांग लेना। कहां से लगता है कि वह पढ़े लिखे है?
फिर सुमंत भट्टाचार्य जैसे मित्रो का क्या होगा जिन्हे भारत की मिटटी और जीवन शैली से अच्छी तरह कोई अन्य नहीं जान सकता। क्या उनके इस ज्ञान को क्वालिफिकेशन माना जाएगा। या फिर धूनी रमाये साधू संत को प्रधानमंत्री होना चाहिए जिनका अंतर्ज्ञान हम सब से अधिक है।
या फिर एक अनपढ़ बूढ़ी माँ जो बादल का रंग देखकर मौसम बता दे, महिलाओ को प्रसव करवा दे और चार-पांच मुस्टंडे लड़को को पाल कर एक जिम्मेदार नागरिक बनाये, जिनमे से एक आज भारत का प्रधानमंत्री है।
Aurangabad Fans Club
"ओम भास्कराय विद्महे मार्तण्डाय धीमहि तनः सूर्य प्रचोदयात्"
🌞 Surya Nagri🌞
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21/05/2026
हमने गूगल किया तो पता चला कि नार्वे की जनसंख्या मात्र 56 लाख है। मतलब हमारी दिल्ली में 4 नार्वे घुस जाएगा। मतलब 56 लाख आबादी वाला देश 140 करोड़ वाले देश को स्वतंत्र पत्रकारिता सिखाएगा। हमारे देश के कुछ लोगों के लिए स्वतंत्र पत्रकारिता का मतलब है बीजेपी और मोदी को गाली देना। जहां बीजेपी और मोदी के समर्थन में कोई बात कहा तुरंत गोदी मीडिया बना देगा।
ऐसा प्रतीत होता है नार्वे की पत्रकार हेली लिंग का सवाल पूर्व प्रायोजित था। पहला उस समय कोई प्रेस कॉन्फ्रेंस नहीं था बल्कि 2 देशों का संयुक्त बयान हो रहा था। सवाल भी उस समय पूछा जब मोदी जी निकल रहे थे। सवाल भी ऐसा कि उसको पहले से पता था कि कोई जवाब नहीं मिलेगा। सवाल गरीबी, बेरोज़गारी, विकास, महंगाई, युद्ध, शिक्षा, चिकित्सा पर नहीं था। सवाल था अल्पसंख्यक और मानव अधिकार पर। मतलब जान बूझकर कैसे सवाल का चुनाव किया गया था जिसमें मोदी जी की प्रतिक्रिया को भुनाना था। लेकिन मोदी जी हैं कि सीधे चलते बने।
मोदी जी को पता है कि अभी डीप स्टेट, जॉर्ज सोरोस, कांग्रेस उनकी विदेशों में पीछा कर रही है ताकि कुछ निकल कर आए। जब कुछ नहीं मिला तो मोदी जी की वहां से निकलते हुए क्लिप को वायरल किया गया। बाकी ये पत्रकार हेली लिंग कोई बड़े मीडिया हाउस की पत्रकार नहीं है। उसने इससे पहले कभी भी किसी से इस तरह के सवाल नहीं पूछे हैं। हो सकता है प्लान के साथ इस तरह के सवाल पूछे गए हों।
ऐसा इसलिए कि यहां भारत में इस घटना को विपक्षी हाथों हाथ ले रहे हैं। ऐसा लगता है ये सारी चीजें पूर्व नियोजित थी। सोचिए उस पत्रकार की X में 1000 फॉलोअर्स भी नहीं थे लेकिन 20 हजार के आस पास हो गए हैं। मतलब कोई बड़ी पत्रकार वो नहीं थी। बाद में जब प्रेस कॉन्फ्रेंस हुआ तो वो जवाब भी नहीं सुनी और वहां से निकल गई। मतलब सारी चीजें प्लानिंग वे में थी। अभी इंतजार कीजिए उस पत्रकार के बारे में कुछ और बड़ी चीजें निकलकर आएंगी।
शास्त्र कहते हैं कि अठारह दिनों के महाभारत युद्ध में उस समय की पुरुष जनसंख्या का 80% सफाया हो गया था। युद्ध के अंत में, संजय कुरुक्षेत्र के उस स्थान पर गए जहां संसार का सबसे महानतम युद्ध हुआ था।
उसने इधर-उधर देखा और सोचने लगा कि क्या वास्तव में यहीं युद्ध हुआ था? यदि यहां युद्ध हुआ था तो जहां वो खड़ा है, वहां की जमीन रक्त से सराबोर होनी चाहिए। क्या वो आज उसी जगह पर खड़ा है जहां महान पांडव और कृष्ण खड़े थे?
तभी एक वृद्ध व्यक्ति ने वहां आकर धीमे और शांत स्वर में कहा, "आप उस बारे में सच्चाई कभी नहीं जान पाएंगे!"
संजय ने धूल के बड़े से गुबार के बीच दिखाई देने वाले भगवा वस्त्रधारी एक वृद्ध व्यक्ति को देखने के लिए उस ओर सिर को घुमाया।
"मुझे पता है कि आप कुरुक्षेत्र युद्ध के बारे में पता लगाने के लिए यहां हैं, लेकिन आप उस युद्ध के बारे में तब तक नहीं जान सकते, जब तक आप ये नहीं जान लेते हैं कि असली युद्ध है क्या?" बूढ़े आदमी ने रहस्यमय ढंग से कहा।
"तुम महाभारत का क्या अर्थ जानते हो?" तब संजय ने उस रहस्यमय व्यक्ति से पूछा।
वह कहने लगा, *"महाभारत एक महाकाव्य है, एक गाथा है, एक वास्तविकता भी है, लेकिन निश्चित रूप से एक दर्शन भी है।"*
वृद्ध व्यक्ति संजय को और अधिक सवालों के चक्कर में फसा कर मुस्कुरा रहा था।
"क्या आप मुझे बता सकते हैं कि दर्शन क्या है?" संजय ने निवेदन किया।
अवश्य जानता हूं, बूढ़े आदमी ने कहना शुरू किया। *पांडव कुछ और नहीं, बल्कि आपकी पाँच इंद्रियाँ हैं -* दृष्टि, गंध, स्वाद, स्पर्श और श्रवण - और क्या आप जानते हैं कि *कौरव क्या हैं?* उसने अपनी आँखें संकीर्ण करते हुए पूछा।
*कौरव ऐसे सौ तरह के विकार हैं, जो आपकी इंद्रियों पर प्रतिदिन हमला करते हैं लेकिन आप उनसे लड़ सकते हैं और जीत भी सकते है।* पर क्या आप जानते हैं कैसे?
संजय ने फिर से न में सर हिला दिया।
"जब कृष्ण आपके रथ की सवारी करते हैं!" यह कह वह वृद्ध व्यक्ति बड़े प्यार से मुस्कुराया और संजय अंतर्दृष्टि खुलने पर जो नवीन रत्न प्राप्त हुआ उस पर विचार करने लगा..
"कृष्ण आपकी आंतरिक आवाज, आपकी आत्मा, आपका मार्गदर्शक प्रकाश हैं और यदि आप अपने जीवन को उनके हाथों में सौप देते हैं तो आपको फिर चिंता करने की कोई आवश्कता नहीं है।" वृद्ध आदमी ने कहा।
संजय अब तक लगभग चेतन अवस्था में पहुंच गया था, लेकिन जल्दी से एक और सवाल लेकर आया।
फिर कौरवों के लिए द्रोणाचार्य और भीष्म क्यों लड़ रहे हैं?
भीष्म हमारे अहंकार का प्रतीक हैं, अश्वत्थामा हमारी वासनाएं, इच्छाएं हैं, जो कि जल्दी नहीं मरतीं। दुर्योधन हमारी सांसारिक वासनाओं, इच्छाओं का प्रतीक है। द्रोणाचार्य हमारे संस्कार हैं। जयद्रथ हमारे शरीर के प्रति राग का प्रतीक है कि 'मैं ये देह हूं' का भाव। द्रुपद वैराग्य का प्रतीक हैं। अर्जुन मेरी आत्मा हैं, मैं ही अर्जुन हूं और स्वनियंत्रित भी हूं। कृष्ण हमारे परमात्मा हैं। पांच पांडव पांच नीचे वाले चक्र भी हैं, मूलाधार से विशुद्ध चक्र तक। द्रोपदी कुंडलिनी शक्ति है, वह जागृत शक्ति है, जिसके ५ पति ५ चक्र हैं। ओम शब्द ही कृष्ण का पांचजन्य शंखनाद है, जो मुझ और आप आत्मा को ढ़ाढ़स बंधाता है कि चिंता मत कर मैं तेरे साथ हूं, अपनी बुराइयों पर विजय पा, अपने निम्न विचारों, निम्न इच्छाओं, सांसारिक इच्छाओं, अपने आंतरिक शत्रुओं यानि कौरवों से लड़ाई कर अर्थात अपनी मेटेरियलिस्टिक वासनाओं को त्याग कर और चैतन्य पाठ पर आरूढ़ हो जा, विकार रूपी कौरव अधर्मी एवं दुष्ट प्रकृति के हैं।
श्री कृष्ण का साथ होते ही ७२००० नाड़ियों में भगवान की चैतन्य शक्ति भर जाती है, और हमें पता चल जाता है कि मैं चैतन्यता, आत्मा, जागृति हूं, मैं अन्न से बना शरीर नहीं हूं, इसलिए उठो जागो और अपने आपको, अपनी आत्मा को, अपने स्वयं सच को जानो, भगवान को पाओ, यही भगवद प्राप्ति या आत्म साक्षात्कार है, यही इस मानव जीवन का सर्वोच्च लक्ष्य है।
ये शरीर ही धर्म क्षेत्र, कुरुक्षेत्र है। धृतराष्ट्र अज्ञान से अंधा हुआ मन है। अर्जुन आप हो, संजय आपके आध्यात्मिक गुरु हैं।
वृद्ध आदमी ने दुःखी भाव के साथ सिर हिलाया और कहा, "जैसे-जैसे आप बड़े होते हैं, अपने बड़ों के प्रति आपकी धारणा बदल जाती है। जिन बुजुर्गों के बारे में आपने सोचा था कि आपके बढ़ते वर्षों में वे संपूर्ण थे, अब आपको लगता है वे सभी परिपूर्ण नहीं हैं। उनमें दोष हैं। और एक दिन आपको यह तय करना होगा कि उनका व्यवहार आपके लिए अच्छा या बुरा है। तब आपको यह भी अहसास हो सकता है कि आपको अपनी भलाई के लिए उनका विरोध करना या लड़ना भी पड़ सकता है। यह बड़ा होने का सबसे कठिन हिस्सा है और यही वजह है कि गीता महत्वपूर्ण है।"
संजय धरती पर बैठ गया, इसलिए नहीं कि वह थका हुआ था, तक गया था, बल्कि इसलिए कि वह जो समझ लेकर यहां आया था, वो एक-एक कर धराशाई हो रही थी। लेकिन फिर भी उसने लगभग फुसफुसाते हुए एक और प्रश्न पूछा, *तब कर्ण के बारे में आपका क्या कहना है?*
"आह!" वृद्ध ने कहा। आपने अंत के लिए सबसे अच्छा प्रश्न बचाकर रखा हुआ है।
"कर्ण आपकी इंद्रियों का भाई है। वह इच्छा है। वह सांसारिक सुख के प्रति आपके राग का प्रतीक है। वह आप का ही एक हिस्सा है, लेकिन वह अपने प्रति अन्याय महसूस करता है और आपके विरोधी विकारों के साथ खड़ा दिखता है। और हर समय विकारों के विचारों के साथ खड़े रहने के कोई न कोई कारण और बहाना बनाता रहता है।"
"क्या आपकी इच्छा; आपको विकारों के वशीभूत होकर उनमें बह जाने या अपनाने के लिए प्रेरित नहीं करती रहती है?" वृद्ध ने संजय से पूछा।
संजय ने स्वीकारोक्ति में सिर हिलाया और भूमि की तरफ सिर करके सारी विचार श्रंखलाओं को क्रमबद्ध कर मस्तिष्क में बैठाने का प्रयास करने लगा। और जब उसने अपने सिर को ऊपर उठाया, वह वृद्ध व्यक्ति धूल के गुबारों के मध्य कहीं विलीन हो चुका था। लेकिन जाने से पहले वह जीवन की वो दिशा एवं दर्शन दे गया था, जिसे आत्मसात करने के अतिरिक्त संजय के सामने अब कोई अन्य मार्ग नहीं बचा था।
🙏 *!! जय श्रीकृष्ण !!* 🙏
12/05/2026
जानवरों से भी बदतर आचरण
नीना गुप्ता को तो जानते ही होंगे,
जिन्हें भारतीय महिलाओं के लिए एक “फेमिनिस्ट आइकन” के रूप में पेश किया जाता है,
क्योंकि उनका विवाहित वेस्ट इंडीज़ क्रिकेटर विव रिचर्ड्स और कई अन्य पुरुषों के साथ संबंध रहे।
• अपने बॉयफ्रेंड अमन कुसुम से शादी की और एक साल बाद तलाक ले लिया
कहा कि उनके सपने इतने बड़े थे कि वे सिर्फ एक गृहिणी बनकर नहीं रह सकती थीं
• 1981 में मुंबई आने के बाद अपने नए बॉयफ्रेंड के साथ लिव-इन रिलेशनशिप में रहीं
• उनका दावा है कि 1983 में वह उन्हें छोड़कर चला गया क्योंकि दोनों आर्थिक रूप से संघर्ष कर रहे थे
• उनके पिता ने दिल्ली में अपनी ज़मीन बेचकर मुंबई में उनके लिए 1BHK फ्लैट खरीदा
• कुछ सफल फिल्मों और सीरियलों में काम किया
• 1986 में Alok Nath के साथ लिव-इन रिलेशनशिप में रहीं, कहती हैं कि उन्होंने उनसे शादी नहीं की
• 1987 में शारंगदेव पंडित के साथ लिव-इन रिलेशनशिप और सगाई हुई, लेकिन शादी टूट गई
• 1987 में उन्हें काम पाने में संघर्ष करना पड़ रहा था उसी साल उनकी मुलाकात वेस्ट इंडीज़ क्रिकेटर विव रिचर्ड्स से हुई
यह जानते हुए भी कि वह शादीशुदा हैं, उन्होंने उनसे संबंध बनाए और 1989 में गर्भवती हो गईं
• उन्होंने मीडिया में चर्चा पाने के लिए विव रिचर्ड्स के साथ अपने रिश्ते को सार्वजनिक किया
• विव रिचर्ड्स ने उनसे शादी करने या उन्हें अपने घर में जगह देने से इनकार कर दिया, लेकिन वर्षों तक रिश्ता बनाए रखा
• उन्होंने अपना 1BHK फ्लैट बेच दिया और माता-पिता के 9 लाख रुपये जोड़कर जुहू में 3BHK फ्लैट खरीदा
• तब तक उन्होंने अपनी मौसी और मौसा के साथ रहने का फैसला किया
• कहा जाता है कि उनकी मौसी ने उन्हें आधी रात को घर से निकाल दिया कुछ लोगों का दावा है कि इसकी वजह यह थी कि नीना अपने मौसा के साथ आपत्तिजनक स्थिति में पकड़ी गई थीं
• बाद में उनके मौसा ने उन्हें रहने के लिए नया घर दिया, और कुछ हफ्तों बाद वे अपने नए 3BHK फ्लैट में शिफ्ट हो गईं
• 90 के दशक के अंत तक नीना और विव कई कार्यक्रमों में साथ दिखाई देते रहे
इसी दौरान उनका एक और शादीशुदा व्यक्ति के साथ लिव-इन रिलेशनशिप रहा
उन्होंने उसका नाम सार्वजनिक नहीं किया, और उसके लिए मुंबई छोड़कर दिल्ली चली गईं
• उनका कहना था कि वह व्यक्ति अपनी पत्नी को छोड़कर उनसे शादी करने के लिए तैयार नहीं था, इसलिए रिश्ता टूट गया
• 2000 के शुरुआती वर्षों में उन्होंने एक और शादीशुदा व्यक्ति, विवेक मेहरा, को डेट करना शुरू किया, जिनके दो बच्चे थे बाद में विवेक मेहरा ने अपनी पत्नी को तलाक दिया और 2008 में नीना से शादी कर ली
आज कई फेमिनिस्ट उन्हें “बोल्ड” और “प्रेरणादायक” महिला के रूप में प्रस्तुत करते हैं
यही आधुनिक भारत की सबसे बड़ी समस्या बताई जाती है। गलत और विवादित जीवन जीने वाली महिलाओं को “बोल्ड” और “इंस्पिरेशनल” कहा जा रहा है।
ऐसी महिलाएं भी हैं जो 5000 रुपये महीने से कम कमाकर, बिना किसी सुरक्षित घर के, अपने बच्चों को सम्मानपूर्वक पालती हैं और संघर्ष करती हैं। लेकिन नीना गुप्ता को माता-पिता से हर सुविधा मिली, फिर भी उन्होंने लगातार अलग-अलग पुरुषों के साथ संबंध बनाए, गर्भवती हुईं, और अंत में उन्हें “फेमिनिस्ट आइकन” बना दिया गया। अगर ऐसी महिलाओं को प्रेरणा माना जाएगा, तो समाज के पतन पर आश्चर्य नहीं होना चाहिए।
07/04/2026
हरिज़न एक्ट का दुरूपयोग देखिये....
तस्वीर मेरठ उत्तर प्रदेश की कोमल देवी की हैं...
यह बीएसएफ जवान नैन सिंह जाटव की पत्नी है
14 साल पहले इनका शादी हुआ था उनके दो बच्चे हैं एक 12 साल की बिटिया है एक 7 साल का बेटा है
नैन सिंह जाटव की पोस्टिंग पश्चिम बंगाल में थी
नैन सिंह जाटव अपनी पत्नी अपने बच्चे अपने पूरे परिवार से बहुत प्यार करते थे अक्सर वह वीडियो कॉल पर अपने परिवार अपने बच्चों से बात भी करते थे
लेकिन 4 साल पहले कोमल देवी जाटव का प्रेम प्रसंग अपने मौसेरे बहन के पति गुलशन के साथ हो गया
जब नैनसिंह जाटव को इस प्रेम संबंध के बारे में पता चला तब कोमल देवी ने कहा कि मैं तुम्हें तलाक देकर गुलशन से शादी करूंगी लेकिन गुलशन बच्चों की खातिर अपना घर नहीं टूटना चाहते थे
फिर अंत में कोमल देवी और उनके प्रेमी ने एक खतरनाक साजिश रची और वह साजिश थी कोमल देवी के पति नैन सिंह जाटव का कत्ल कर दिया जाए और इस मामले में गांव के किसी राजपूत परिवार को फंसा दिया जाए ताकि दलित के हत्या पर मिलने वाला 15 लाख का मुआवजा भी मिल जाए
उसके बाद नैन सिंह जाटव छुट्टियों में घर आए थे तभी एक व्यक्ति उनके घर में घुसता है और उनकी गोली मारकर हत्या कर देता है
अब यह लोगों ने यानी कोमल देवी ने इल्जाम गांव के एक राजपूत परिवार पर लगा दिया क्योंकि उस परिवार से जमीन का विवाद चल रहा था
और इस मामले में चंद्रशेखर रावण भीम आर्मी भी कूद पड़ा क्योंकि सामने वाली पार्टी राजपूत थी खूब जातिगत नफरत वाले बयान बाजी की गई परिवार बार-बार कहता था कि राजपूत परिवार ने ही कत्ल करवाया है
पुलिस ने शुरू में राजपूत परिवार के चार लोगों को हिरासत में भी लिया लेकिन पूछताछ में वह निर्दोष थे
जब इलेक्ट्रॉनिक सर्विलांस और मोबाइल सर्विलांस की गई तब कोमल देवी और गुलशन के बीच की सारी बातचीत पुलिस के हाथ लगी
यहां तक की गुलशन देवी ने अपने गहने बेचकर 6 लाख रुपए जुटाये थे और उन्हें पैसों से उसने अपने पति के कत्ल की सुपारी दी
सभी पांचो आरोपी कमल देवी गुलशन और तीन अन्य गिरफ्तार हो चुके हैं और जैसे ही असली कातिलों का खुलासा हुआ भीम आर्मी वाले और चंद्रशेखर दूम दबाकर भाग लिया अब चंद्रशेखर रावण भी चुप है ।
07/03/2026
औरंगाबाद के रेलवे स्टेशनों का परिचय – एक श्रृंखला
स्टेशन: सोंनगर जंक्शन (SEB)
औरंगाबाद की धरती पर कुछ जगहें ऐसी हैं जहाँ सिर्फ रास्ते नहीं मिलते, कहानियाँ भी मिलती हैं। सोंनगर जंक्शन उन्हीं में से एक है। यह स्टेशन केवल एक ठहराव नहीं, बल्कि इस क्षेत्र की यात्रा, इतिहास और विकास का गवाह रहा है। सोन नदी के पूर्वी किनारे पर बसा यह स्टेशन लंबे समय से यात्रियों और मालगाड़ियों की आवाजाही का अहम केंद्र रहा है। आज भले ही यहाँ रोजमर्रा की हलचल दिखाई देती हो, लेकिन इसकी कहानी एक सदी से भी पुरानी है।
सोंनगर जंक्शन की स्थापना वर्ष 1902 में हुई थी। उस दौर में जब भारत में रेल नेटवर्क तेज़ी से फैल रहा था, तब इस स्टेशन ने भी अपनी पहचान बनानी शुरू की। पहले इसका नाम Son East Bank हुआ करता था, क्योंकि यह सोन नदी के पूर्वी किनारे पर स्थित है। बाद में समय के साथ यह सोंनगर जंक्शन के नाम से जाना जाने लगा। 20वीं सदी की शुरुआत में जब ग्रैंड कॉर्ड रेल लाइन और आसपास के रेलवे नेटवर्क का विस्तार हुआ, तब सोंनगर इस पूरे क्षेत्र के लिए एक महत्वपूर्ण कड़ी बन गया। यहाँ से कई दिशाओं में रेल मार्ग जुड़े, जिसने इसे एक साधारण स्टेशन से जंक्शन की पहचान दिलाई। आज भी अगर सुबह के समय सोंनगर स्टेशन पर खड़े होकर देखें तो एक अलग ही जीवन दिखाई देता है। प्लेटफॉर्म पर चाय की भाप उठती है, दूर से आती ट्रेन की सीटी सुनाई देती है, और लोग अपने-अपने सफर की शुरुआत करते दिखते हैं। कोई शहर की ओर निकल रहा होता है, कोई काम से लौट रहा होता है, तो कोई अपने घर की ओर जा रही ट्रेन का इंतजार कर रहा होता है।
यह स्टेशन आसपास के कस्बों, जैसे बारुण और दाउदनगर, के लोगों के लिए बड़े शहरों से जुड़ने का महत्वपूर्ण माध्यम भी रहा है। यहाँ से गुजरती ट्रेनें केवल यात्रियों को नहीं ले जातीं, वे उम्मीदें, सपने और कहानियाँ भी साथ लेकर चलती हैं। सोंनगर जंक्शन हमें यह एहसास कराता है कि रेलवे स्टेशन केवल पटरियों और प्लेटफॉर्म का नाम नहीं है। यह समय का एक ऐसा पड़ाव है जहाँ हर दिन हजारों यात्राएँ शुरू होती हैं और कई यादें बनती हैं।
औरंगाबाद के रेलवे स्टेशनों की इस श्रृंखला में अगले भाग में हम जिले के एक और स्टेशन की कहानी लेकर आएँगे। 🚆
06/03/2026
स्टेशन का नाम बूझो तो जाने 😄
बेस्ट मुख्यमंत्री का नाम पूछा जाए तो भारत के
सभी मुख्यमंत्रियों में
किसका नाम सबसे ऊपर
आएगा.?🤔
27/01/2026
UGC के नए नियम पर क्यों मचा है देश में बवाल? समझें क्या है पूरा विवाद, क्या है स्वर्णों की मांगे।
25/01/2026
A woman from Patna who thought her husband and young son were not good enough for her. She had been married for four years and had a child, but she was bored. She wanted Thrills. She fell in love with a stranger on Social Media. Her husband warned her, he tried to stop her, but she didn't listen. She was so blinded by lust and Online Love that she abandoned her own child and husband to run away with a guy she barely knew.
She reached Patna Junction, bags packed, waiting for her Prince Charming to whisk her away. But the Lover never showed up. He ghosted her. She stood there, stranded and foolish, having destroyed her home for a man who treated her like a joke. Instead of going back in shame, she made another stupid decision. Alone and desperate at the station, she trusted another stranger who promised her a job in West Bengal. She was so eager to escape her family life that she walked right into a trap.
The stranger drove her to Bengal and sold her like cattle. He sold her for just ₹2 Lakhs to a brothel in Islampur. The woman who wanted freedom, she got Slavery in a brothel. For 8 months, she lived in a nightmare. The Excitement she chased turned into daily abuse. She was trapped, used by strangers, and treated like an object. She cried and begged customers to help her, realizing too late that her boring husband was actually her protector.
Who saved her? Not the Instagram Lover. Not the Job Giver. It was the Husband she betrayed. A customer took pity on her and called her husband. She cried on a video call, saying, "Everyone here is r* ping me, please save me." Despite her cheating and abandonment, the husband rushed to the Police and got her rescued.
This is a slap in the face to everyone who thinks the grass is greener on the other side. You left a man who would walk through fire for you, for a lover who wouldn't even walk to the station. The traffickers are monsters who deserve the worst punishment but let’s not pretend this woman is just a victim of circumstance. She is a victim of her own delusion. She destroyed her own life and traumatized her child because she chased a cheap online fantasy.
Social Media isn't real life. If you leave your family for a stranger, don't be shocked when you end up in a cage. The world outside your safe home is not a fairytale. It is full of wolves waiting for you to make one stupid mistake.
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