10/12/2025
प्रतिवर्ष 10 दिसंबर को विश्व मानवाधिकार दिवस का आयोजन किया जाता है। इसी दिन संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा वर्ष 1948 में मानवाधिकारों की सार्वभौम घोषणा (UDHR) को अपनाया गया था।
इसका मुख्य उद्देश्य समानता, शांति, न्याय, स्वतंत्रता एवं मानव गरिमा की सुरक्षा को बढ़ावा देना है।
प्रत्येक व्यक्ति नस्ल, रंग, धर्म, लिंग, भाषा, राजनीतिक, राष्ट्रीय या सामाजिक मूल, संपत्ति, जन्म या अन्य स्थिति के भिन्न होने के बावजूद भी मानवाधिकारों के हक के संरक्षण का अधिकार रखता है।
राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग (एनएचआरसी) द्वारा भारत मंडपम, नई दिल्ली में मानवाधिकार दिवस पर 'दैनिक आवश्यकताएं सुनिश्चित करनाः सभी के लिए सार्वजनिक सेवाएं और गरिमा' विषय पर एक राष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित किया जा रहा है। यह सम्मेलन इस वर्ष के मानवाधिकार दिवस की थीम 'मानवाधिकार, हमारी दैनिक आवश्यकताएं' के अनुरूप है।
भारत में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग का गठन 12 अक्टूबर, 1993 को हुआ था। जिस क़ानून के तहत इसे स्थापित किया गया है वह मानवाधिकार संरक्षण अधिनियम (पीएचआरए), 1993 है जिसे मानवाधिकार संरक्षण (संशोधन) अधिनियम, 2019 द्वारा संशोधित किया गया है।
राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग का गठन पेरिस सिद्धांतों के अनुरूप है जिन्हें अक्टूबर, 1991 में पेरिस में मानव अधिकार संरक्षण एवं संवर्द्धन के लिए राष्ट्रीय संस्थानों पर आयोजित पहली अंतर्राष्ट्रीय कार्यशाला में अंगीकृत किया गया था तथा 20 दिसम्बर, 1993 में संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा संकल्प 48/134 के रूप में समर्थित किया गया था।