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15/08/2026

स्वतंत्रता दिवस :

“स्वतंत्रता हमारा जन्मसिद्ध अधिकार ही नहीं, बल्कि एक महान जिम्मेदारी भी है।”

भारत का स्वतंत्रता दिवस प्रत्येक वर्ष 15 अगस्त को पूरे देश में हर्ष, उल्लास और राष्ट्रीय गौरव के साथ मनाया जाता है। यह भारत के इतिहास का एक अत्यंत महत्वपूर्ण दिन है। 15 अगस्त 1947 को भारत ने लगभग दो शताब्दियों के ब्रिटिश औपनिवेशिक शासन से स्वतंत्रता प्राप्त की। यह स्वतंत्रता किसी एक व्यक्ति या संगठन के प्रयास का परिणाम नहीं थी, बल्कि लाखों भारतीयों के लंबे संघर्ष, त्याग, बलिदान और दृढ़ संकल्प का परिणाम थी। इसलिए स्वतंत्रता दिवस केवल उत्सव का दिन नहीं, बल्कि स्वतंत्रता सेनानियों के बलिदान को स्मरण करने और राष्ट्र के प्रति अपने कर्तव्यों का संकल्प लेने का अवसर है।

स्वतंत्रता संग्राम की पृष्ठभूमि :

भारत में ब्रिटिश सत्ता का विस्तार धीरे-धीरे हुआ। ईस्ट इंडिया कंपनी ने व्यापार के माध्यम से भारत में प्रवेश किया और बाद में राजनीतिक सत्ता पर अपना नियंत्रण स्थापित कर लिया। ब्रिटिश शासन की आर्थिक नीतियों से भारतीय कारीगरों, किसानों और व्यापारियों को भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। सामाजिक और राजनीतिक असंतोष भी बढ़ता गया।

1857 का विद्रोह ब्रिटिश शासन के विरुद्ध एक बड़ी ऐतिहासिक घटना थी। मंगल पांडे, रानी लक्ष्मीबाई, बहादुर शाह जफर, तात्या टोपे और अनेक अन्य वीरों ने इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। यद्यपि यह विद्रोह तत्काल स्वतंत्रता प्राप्त नहीं कर सका, लेकिन इसने भारतीयों में राष्ट्रीय चेतना को मजबूत किया।

राष्ट्रीय आंदोलन का विकास :

1885 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की स्थापना के बाद स्वतंत्रता आंदोलन को एक संगठित राजनीतिक मंच मिला। प्रारंभिक नेताओं ने संवैधानिक सुधारों और राजनीतिक अधिकारों की मांग की। बाद में आंदोलन अधिक व्यापक और जन-आधारित होता गया।

महात्मा गांधी के नेतृत्व में भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन को नई दिशा मिली। उन्होंने सत्य, अहिंसा और जनभागीदारी को आंदोलन का आधार बनाया। असहयोग आंदोलन, सविनय अवज्ञा आंदोलन और भारत छोड़ो आंदोलन ने ब्रिटिश शासन के विरुद्ध व्यापक जनसमर्थन पैदा किया।

भारत छोड़ो आंदोलन 1942 में शुरू हुआ और इसका संदेश था—“करो या मरो।” इस आंदोलन ने ब्रिटिश शासन को यह स्पष्ट कर दिया कि भारत अब लंबे समय तक विदेशी शासन को स्वीकार करने वाला नहीं है।

क्रांतिकारियों का योगदान :

भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन में क्रांतिकारियों की भूमिका भी अत्यंत महत्वपूर्ण थी। भगत सिंह, राजगुरु, सुखदेव, चंद्रशेखर आजाद और राम प्रसाद बिस्मिल जैसे युवाओं ने अपने साहस और बलिदान से देशवासियों में राष्ट्रभक्ति की भावना जगाई।

नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने आजाद हिंद फौज के माध्यम से स्वतंत्रता के संघर्ष को एक अलग दिशा दी। उनका प्रसिद्ध आह्वान—“तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हें आजादी दूंगा”—देशवासियों में साहस और देशभक्ति की भावना जगाने वाला था।

स्वतंत्रता की प्राप्ति :

द्वितीय विश्व युद्ध के बाद ब्रिटेन की आर्थिक और राजनीतिक स्थिति कमजोर हो गई। भारत में स्वतंत्रता की मांग लगातार मजबूत होती गई। अंततः ब्रिटिश सरकार ने भारत को स्वतंत्र करने का निर्णय लिया। 15 अगस्त 1947 को भारत स्वतंत्र राष्ट्र बना।

इस ऐतिहासिक अवसर पर पंडित जवाहरलाल नेहरू ने प्रधानमंत्री के रूप में राष्ट्र को संबोधित किया। भारत ने स्वतंत्रता के साथ-साथ विभाजन की पीड़ा भी झेली। लाखों लोगों को विस्थापन और कठिन परिस्थितियों का सामना करना पड़ा। इसलिए स्वतंत्रता का यह अवसर खुशी के साथ-साथ गहरे मानवीय दुख से भी जुड़ा हुआ था।

स्वतंत्रता दिवस का राष्ट्रीय समारोह

हर वर्ष स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर देशभर में विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। विद्यालयों, महाविद्यालयों, सरकारी कार्यालयों और अन्य संस्थानों में राष्ट्रीय ध्वज फहराया जाता है। राष्ट्रगान गाया जाता है तथा स्वतंत्रता सेनानियों को श्रद्धांजलि दी जाती है।

नई दिल्ली के लाल किले पर भारत के प्रधानमंत्री राष्ट्रीय ध्वज फहराते हैं और राष्ट्र को संबोधित करते हैं। प्रधानमंत्री सरकार की उपलब्धियों, देश की चुनौतियों और भविष्य की योजनाओं पर विचार रखते हैं।

विद्यालयों में भाषण, निबंध, वाद-विवाद, सांस्कृतिक कार्यक्रम और देशभक्ति से जुड़े कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। बच्चे और युवा स्वतंत्रता सेनानियों के जीवन से प्रेरणा लेते हैं।

स्वतंत्रता का वास्तविक अर्थ :

स्वतंत्रता का अर्थ केवल विदेशी शासन से मुक्ति प्राप्त करना नहीं है। स्वतंत्रता का वास्तविक अर्थ है कि नागरिकों को सम्मानपूर्वक जीवन जीने, शिक्षा प्राप्त करने, अपनी बात रखने और विकास के समान अवसर प्राप्त हों।

भारत का संविधान नागरिकों को अनेक मौलिक अधिकार प्रदान करता है। साथ ही नागरिकों के लिए कुछ मौलिक कर्तव्य भी निर्धारित करता है। इसलिए स्वतंत्रता के साथ जिम्मेदारी भी जुड़ी हुई है।

हमें संविधान का सम्मान करना चाहिए, कानून का पालन करना चाहिए और देश की एकता एवं अखंडता की रक्षा करनी चाहिए। हमें सार्वजनिक संपत्ति की रक्षा, पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक सद्भाव को बढ़ावा देने में योगदान देना चाहिए।

वर्तमान भारत और चुनौतियाँ :

स्वतंत्रता के बाद भारत ने अनेक क्षेत्रों में उल्लेखनीय प्रगति की है। कृषि, उद्योग, विज्ञान, तकनीक, शिक्षा, स्वास्थ्य, अंतरिक्ष और डिजिटल क्षेत्र में भारत ने महत्वपूर्ण उपलब्धियाँ हासिल की हैं। भारत का लोकतंत्र भी विश्व के सबसे बड़े लोकतांत्रिक व्यवस्थाओं में से एक है।

फिर भी हमारे सामने कई चुनौतियाँ हैं। गरीबी, बेरोजगारी, अशिक्षा, भ्रष्टाचार, सामाजिक असमानता, प्रदूषण और पर्यावरण संरक्षण जैसी समस्याएँ अभी भी मौजूद हैं।

इन समस्याओं का समाधान केवल सरकार के प्रयासों से संभव नहीं है। नागरिकों को भी जिम्मेदारीपूर्वक अपनी भूमिका निभानी होगी। हमें शिक्षा, कौशल, रोजगार, वैज्ञानिक सोच और सामाजिक सहयोग को बढ़ावा देना चाहिए।

युवाओं की भूमिका :

भारत की बड़ी युवा आबादी देश की सबसे महत्वपूर्ण शक्तियों में से एक है। युवा शिक्षा और कौशल के माध्यम से अपने भविष्य को मजबूत बनाने के साथ राष्ट्र के विकास में भी योगदान दे सकते हैं।

युवाओं को केवल सरकारी नौकरी को सफलता का एकमात्र माध्यम नहीं मानना चाहिए। विज्ञान, तकनीक, उद्यमिता, कृषि, खेल, अनुसंधान और सामाजिक सेवा जैसे क्षेत्रों में भी राष्ट्र निर्माण के अनेक अवसर हैं।

युवाओं में अनुशासन, ईमानदारी, परिश्रम, वैज्ञानिक दृष्टिकोण और संवैधानिक मूल्यों का विकास आवश्यक है।

एकता और राष्ट्र निर्माण :

भारत विविधताओं का देश है। यहाँ अनेक भाषाएँ, धर्म, संस्कृतियाँ और परंपराएँ हैं। यह विविधता हमारी कमजोरी नहीं, बल्कि हमारी शक्ति है। स्वतंत्रता दिवस हमें यह संदेश देता है कि हमें अपनी विविधताओं का सम्मान करते हुए राष्ट्रीय एकता को मजबूत करना चाहिए।

जाति, धर्म, भाषा और क्षेत्र के आधार पर भेदभाव समाज को कमजोर करता है। हमें समानता, भाईचारे और परस्पर सम्मान की भावना को बढ़ावा देना चाहिए।

स्वतंत्रता दिवस हमारे लिए इतिहास, गौरव, जिम्मेदारी और भविष्य के संकल्प का पर्व है। यह दिन हमें उन असंख्य स्वतंत्रता सेनानियों के त्याग की याद दिलाता है, जिन्होंने देश की आजादी के लिए अपना जीवन समर्पित कर दिया।

आज हमारा कर्तव्य है कि हम स्वतंत्रता के मूल्यों की रक्षा करें और देश को प्रगति के मार्ग पर आगे बढ़ाएँ। हमें ईमानदारी से अपने कार्य करने, संविधान का सम्मान करने, सामाजिक सद्भाव बनाए रखने और राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखने का संकल्प लेना चाहिए।

यदि प्रत्येक नागरिक अपने कर्तव्यों को ईमानदारी से निभाए, तो भारत को एक समृद्ध, शिक्षित, आत्मनिर्भर, न्यायपूर्ण और विकसित राष्ट्र बनाने का सपना अवश्य साकार हो सकता है।

“देश की स्वतंत्रता हमें विरासत में मिली है, लेकिन उसकी रक्षा और प्रगति की जिम्मेदारी हमारी है।”

जय हिन्द!
वन्दे मातरम्!

14/08/2026

Physics

1. न्यूटन के द्वितीय नियम का गणितीय रूप है—
A) F = mv
B) F = ma
C) F = m/a
D) F = a/m
उत्तर: B

2. संवेग किसके बराबर होता है?
A) ma
B) mv
C) mv²
D) m/v
उत्तर: B

3. कोणीय संवेग का सूत्र है—
A) L = r × p
B) L = r/p
C) L = p/r
D) L = mv²
उत्तर: A

4. बल आघूर्ण (Torque) का SI मात्रक है—
A) N
B) N m
C) J/s
D) kg m/s
उत्तर: B

5. वृत्तीय गति में अभिकेन्द्रीय त्वरण होता है—
A) v/r
B) v²/r
C) vr
D) r/v²
उत्तर: B

6. पलायन वेग किस पर निर्भर करता है?
A) केवल वस्तु के द्रव्यमान पर
B) ग्रह के द्रव्यमान और त्रिज्या पर
C) केवल वस्तु के आकार पर
D) केवल समय पर
उत्तर: B

7. पृथ्वी की सतह से पलायन वेग लगभग है—
A) 5.6 km/s
B) 9.8 km/s
C) 11.2 km/s
D) 15.6 km/s
उत्तर: C

8. पूर्णतः प्रत्यास्थ टक्कर में संरक्षित रहते हैं—
A) केवल संवेग
B) केवल गतिज ऊर्जा
C) संवेग और गतिज ऊर्जा दोनों
D) केवल स्थितिज ऊर्जा
उत्तर: C

9. जड़त्व आघूर्ण का SI मात्रक है—
A) kg m
B) kg m²
C) kg/m²
D) N m
उत्तर: B

10. सरल लोलक का आवर्तकाल मुख्यतः निर्भर करता है—
A) द्रव्यमान पर
B) लंबाई पर
C) गोले के रंग पर
D) आयतन पर
उत्तर: B

11. ∇ ऑपरेटर को कहा जाता है—
A) Laplacian
B) Del operator
C) Fourier operator
D) Matrix operator
उत्तर: B

12. किसी scalar field का gradient होता है—
A) Scalar
B) Vector
C) Tensor
D) Constant
उत्तर: B

13. Divergence का परिणाम होता है—
A) Scalar
B) Vector
C) Tensor
D) Matrix
उत्तर: A

14. Curl का परिणाम होता है—
A) Scalar
B) Vector
C) केवल संख्या
D) Tensor
उत्तर: B

15. Laplacian operator का प्रतीक है—
A) ∇
B) ∇²
C) ∇×
D) ∇·
उत्तर: B

16. Fourier series का उपयोग मुख्यतः किसके लिए किया जाता है?
A) आवर्ती फलनों के निरूपण में
B) केवल द्रव गति में
C) केवल परमाणु संरचना में
D) केवल ऊष्मा मापन में
उत्तर: A

17. किसी matrix का determinant होता है—
A) हमेशा vector
B) एक scalar
C) tensor
D) differential equation
उत्तर: B

18. Eigenvalue equation है—
A) Ax = λx
B) Ax = x/λ
C) A = λ + x
D) A = xλ²
उत्तर: A

19. ∇·E किससे संबंधित है?
A) Gauss's law
B) Faraday's law
C) Ohm's law
D) Lenz's law
उत्तर: A

20. Laplace equation है—
A) ∇V = 0
B) ∇²V = 0
C) ∇×V = 0
D) ∇·V = 1
उत्तर: B

21. Hooke's law के अनुसार—
A) Stress ∝ Strain
B) Stress ∝ 1/Strain
C) Stress = 0
D) Strain ∝ Mass
उत्तर: A

22. Young modulus की SI इकाई है—
A) N
B) N/m
C) N/m²
D) m/N
उत्तर: C

23. पृष्ठ तनाव की SI इकाई है—
A) N/m
B) N/m²
C) J/m²
D) दोनों A और C
उत्तर: D

24. श्यानता (Viscosity) का SI मात्रक है—
A) Pa·s
B) N
C) J
D) W
उत्तर: A

25. Bernoulli theorem किस संरक्षण सिद्धांत पर आधारित है?
A) आवेश
B) ऊर्जा
C) संवेग
D) द्रव्यमान
उत्तर: B

26. Reynolds number की कोई—
A) kg इकाई
B) m इकाई
C) SI इकाई नहीं होती
D) Pa इकाई
उत्तर: C

27. द्रव में दाब गहराई बढ़ने पर—
A) घटता है
B) बढ़ता है
C) स्थिर रहता है
D) शून्य हो जाता है
उत्तर: B

28. Archimedes principle किससे संबंधित है?
A) उत्प्लावन
B) विद्युत धारा
C) ऊष्मा
D) प्रकाश
उत्तर: A

29. Bulk modulus किससे संबंधित है?
A) आयतन प्रत्यास्थता
B) लंबाई प्रत्यास्थता
C) आकृति प्रत्यास्थता
D) तापीय चालकता
उत्तर: A

30. Poisson ratio का कोई—
A) विमा नहीं है
B) kg/m³ विमा है
C) N/m² विमा है
D) m/s विमा है
उत्तर: A

31. ऊष्मागतिकी का प्रथम नियम किसका संरक्षण बताता है?
A) ऊर्जा
B) आवेश
C) संवेग
D) द्रव्यमान
उत्तर: A

32. ऊष्मागतिकी का द्वितीय नियम किस अवधारणा से संबंधित है?
A) एंट्रॉपी
B) आवेश
C) दाब
D) वेग
उत्तर: A

33. आदर्श गैस समीकरण है—
A) PV = nRT
B) P = n/V
C) V = n/P
D) PV = RT/n
उत्तर: A

34. गैस का तापमान किसका माप है?
A) औसत गतिज ऊर्जा
B) कुल द्रव्यमान
C) कुल आवेश
D) आयतन
उत्तर: A

35. Carnot engine की दक्षता निर्भर करती है—
A) केवल working substance पर
B) source और sink के तापमान पर
C) इंजन के रंग पर
D) दबाव पर ही
उत्तर: B

36. Carnot engine की दक्षता कभी नहीं हो सकती—
A) 10%
B) 50%
C) 90%
D) 100%
उत्तर: D

37. एंट्रॉपी की SI इकाई है—
A) J/K
B) J
C) W/K
D) N/K
उत्तर: A

38. Maxwell-Boltzmann statistics लागू होती है—
A) Classical particles पर
B) केवल photons पर
C) केवल electrons पर
D) केवल fermions पर
उत्तर: A

39. Bose-Einstein statistics लागू होती है—
A) Fermions पर
B) Bosons पर
C) केवल electrons पर
D) केवल protons पर
उत्तर: B

40. Fermi-Dirac statistics लागू होती है—
A) Bosons पर
B) Fermions पर
C) photons पर
D) phonons पर
उत्तर: B

41. Coulomb's law में बल किसके समानुपाती होता है?
A) r
B) 1/r
C) 1/r²
D) r²
उत्तर: C

42. विद्युत विभव की SI इकाई है—
A) Ampere
B) Volt
C) Coulomb
D) Ohm
उत्तर: B

43. विद्युत धारा की SI इकाई है—
A) Volt
B) Ohm
C) Ampere
D) Watt
उत्तर: C

44. Capacitance की SI इकाई है—
A) Tesla
B) Farad
C) Weber
D) Henry
उत्तर: B

45. Inductance की SI इकाई है—
A) Farad
B) Henry
C) Tesla
D) Coulomb
उत्तर: B

46. चुंबकीय फ्लक्स की SI इकाई है—
A) Tesla
B) Weber
C) Henry
D) Gauss
उत्तर: B

47. Tesla किसकी इकाई है?
A) चुंबकीय क्षेत्र
B) विद्युत आवेश
C) प्रतिरोध
D) धारिता
उत्तर: A

48. Faraday's law किससे संबंधित है?
A) Electromagnetic induction
B) Electrostatic force
C) Heat conduction
D) Nuclear force
उत्तर: A

49. Lenz's law किस संरक्षण सिद्धांत से संबंधित है?
A) ऊर्जा
B) द्रव्यमान
C) आवेश
D) कोणीय संवेग
उत्तर: A

50. Maxwell ने कितने मूलभूत विद्युतचुंबकीय समीकरणों को व्यवस्थित किया?
A) 2
B) 3
C) 4
D) 5
उत्तर: C

51. प्रकाश के परावर्तन का नियम है—
A) i = r
B) i > r
C) i < r
D) i + r = 90°
उत्तर: A

52. अपवर्तनांक का संबंध है—
A) n = c/v
B) n = v/c
C) n = cv
D) n = c + v
उत्तर: A

53. पूर्ण आंतरिक परावर्तन के लिए प्रकाश जाना चाहिए—
A) विरल से सघन माध्यम में
B) सघन से विरल माध्यम में
C) निर्वात से वायु में
D) किसी भी दिशा में
उत्तर: B

54. Optical fibre किस सिद्धांत पर कार्य करता है?
A) व्यतिकरण
B) पूर्ण आंतरिक परावर्तन
C) ध्रुवण
D) विवर्तन
उत्तर: B

55. Young's double slit experiment किसे प्रदर्शित करता है?
A) व्यतिकरण
B) ध्रुवण
C) फोटोइलेक्ट्रिक प्रभाव
D) Compton effect
उत्तर: A

56. विवर्तन किस प्रकृति को प्रदर्शित करता है?
A) कण
B) तरंग
C) केवल विद्युत
D) केवल चुंबकीय
उत्तर: B

57. Brewster angle पर परावर्तित और अपवर्तित किरणों के बीच कोण होता है—
A) 0°
B) 45°
C) 90°
D) 180°
उत्तर: C

58. उत्तल लेंस सामान्यतः होता है—
A) अभिसारी
B) अपसारी
C) परावर्तक
D) अपारदर्शी
उत्तर: A

59. अवतल लेंस होता है—
A) अभिसारी
B) अपसारी
C) ध्रुवक
D) परावर्तक
उत्तर: B

60. Laser light होती है—
A) incoherent
B) coherent
C) केवल सफेद
D) असंगत
उत्तर: B

61. तरंग की चाल का सूत्र है—
A) v = fλ
B) v = f/λ
C) v = λ/f
D) v = f + λ
उत्तर: A

62. आवृत्ति की SI इकाई है—
A) Second
B) Hertz
C) Meter
D) Radian
उत्तर: B

63. आवर्तकाल और आवृत्ति का संबंध है—
A) T = f
B) T = 1/f
C) T = f²
D) T = 2f
उत्तर: B

64. ध्वनि तरंग सामान्यतः होती है—
A) अनुप्रस्थ
B) अनुदैर्ध्य
C) विद्युतचुंबकीय
D) स्थिर
उत्तर: B

65. Doppler effect किससे संबंधित है?
A) स्रोत और प्रेक्षक की सापेक्ष गति
B) केवल तापमान
C) केवल दाब
D) केवल आयाम
उत्तर: A

66. अनुनाद (Resonance) कब होता है?
A) driving frequency = natural frequency
B) frequency = 0
C) amplitude = 0
D) mass = 0
उत्तर: A

67. सरल आवर्त गति में माध्य स्थिति पर वेग—
A) अधिकतम होता है
B) शून्य होता है
C) न्यूनतम होता है
D) अनंत होता है
उत्तर: A

68. SHM में चरम स्थिति पर वेग होता है—
A) अधिकतम
B) शून्य
C) अनंत
D) स्थिर
उत्तर: B

69. सरल लोलक का आवर्तकाल किसके समानुपाती है?
A) √L
B) L
C) 1/L
D) L²
उत्तर: A

70. Angular frequency और frequency का संबंध है—
A) ω = f/2π
B) ω = 2πf
C) ω = π/f
D) ω = f²
उत्तर: B

71. Planck का quantum relation है—
A) E = hν
B) E = h/ν
C) E = mc
D) E = mv
उत्तर: A

72. Photoelectric effect की व्याख्या किसने की?
A) Newton
B) Einstein
C) Rutherford
D) Bohr
उत्तर: B

73. Photon का rest mass होता है—
A) 1 kg
B) 9.1 × 10⁻³¹ kg
C) शून्य
D) अनंत
उत्तर: C

74. Photon का संवेग है—
A) p = h/λ
B) p = hλ
C) p = λ/h
D) p = mc²
उत्तर: A

75. De Broglie hypothesis किससे संबंधित है?
A) Matter waves
B) Nuclear force
C) Gravity
D) Heat
उत्तर: A

76. Heisenberg uncertainty principle संबंधित है—
A) ΔxΔp ≥ ħ/2
B) ΔxΔp = 0
C) Δx = Δp
D) Δx/Δp = 1
उत्तर: A

77. Schrödinger equation किससे संबंधित है?
A) Classical mechanics
B) Quantum mechanics
C) Thermodynamics
D) Fluid mechanics
उत्तर: B

78. Wave function को सामान्यतः किस प्रतीक से दर्शाते हैं?
A) ψ
B) λ
C) μ
D) σ
उत्तर: A

79. |ψ|² का भौतिक अर्थ है—
A) ऊर्जा
B) Probability density
C) संवेग
D) वेग
उत्तर: B

80. Bohr model में angular momentum का quantization है—
A) nh/2π
B) nh
C) h/n
D) n²h
उत्तर: A

81. परमाणु नाभिक में पाए जाते हैं—
A) केवल electrons
B) protons और neutrons
C) photons
D) केवल neutrons
उत्तर: B

82. परमाणु क्रमांक किसके बराबर होता है?
A) न्यूट्रॉन संख्या
B) प्रोटॉन संख्या
C) द्रव्यमान संख्या
D) प्रोटॉन + न्यूट्रॉन
उत्तर: B

83. Mass number बराबर होता है—
A) केवल proton
B) केवल neutron
C) proton + neutron
D) electron + proton
उत्तर: C

84. Alpha particle वास्तव में है—
A) electron
B) proton
C) helium nucleus
D) neutron
उत्तर: C

85. Beta-minus particle है—
A) proton
B) electron
C) neutron
D) photon
उत्तर: B

86. Gamma rays हैं—
A) charged particles
B) electromagnetic radiation
C) neutrons
D) protons
उत्तर: B

87. रेडियोधर्मी क्षय किस प्रकार की प्रक्रिया है?
A) स्वस्फूर्त
B) केवल बाहरी दबाव से
C) केवल ताप से
D) केवल प्रकाश से
उत्तर: A

88. Half-life का अर्थ है—
A) पूरे पदार्थ के क्षय का समय
B) आधे radioactive nuclei के क्षय का समय
C) तापमान आधा होने का समय
D) ऊर्जा आधी होने का समय
उत्तर: B

89. Nuclear fission में—
A) भारी नाभिक टूटता है
B) हल्के नाभिक जुड़ते हैं
C) electron टूटता है
D) photon टूटता है
उत्तर: A

90. Nuclear fusion में—
A) भारी नाभिक टूटता है
B) हल्के नाभिक जुड़ते हैं
C) केवल electron निकलता है
D) केवल gamma ray बनती है
उत्तर: B

91. Intrinsic semiconductor में impurity—
A) होती है
B) नहीं होती
C) बहुत अधिक होती है
D) केवल धातु होती है
उत्तर: B

92. Silicon की सामान्य valency है—
A) 2
B) 3
C) 4
D) 5
उत्तर: C

93. n-type semiconductor में majority carriers होते हैं—
A) holes
B) electrons
C) protons
D) ions
उत्तर: B

94. p-type semiconductor में majority carriers होते हैं—
A) electrons
B) holes
C) neutrons
D) photons
उत्तर: B

95. Diode का मुख्य कार्य है—
A) rectification
B) amplification
C) oscillation
D) केवल heating
उत्तर: A

96. LED का पूरा नाम है—
A) Light Energy Device
B) Light Emitting Diode
C) Linear Emitting Device
D) Light Electron Detector
उत्तर: B

97. Transistor में कितने terminals होते हैं?
A) 2
B) 3
C) 4
D) 5
उत्तर: B

98. Transistor के तीन terminals हैं—
A) Anode, Cathode, Gate
B) Emitter, Base, Collector
C) Source, Gate, Drain
D) Input, Output, Ground
उत्तर: B

99. Zener diode का प्रमुख उपयोग है—
A) Voltage regulation
B) Heating
C) प्रकाश उत्पादन
D) ध्वनि उत्पादन
उत्तर: A

100. Digital electronics में binary system में कितने digits होते हैं?
A) 1
B) 2
C) 8
D) 10
उत्तर: B — 0 और 1

13/08/2026

आहत : मनुष्य की संवेदना, संघर्ष और आत्मबल
_________________________________________

“आहत” शब्द सामान्यतः उस व्यक्ति के लिए प्रयुक्त होता है जिसे किसी प्रकार की चोट पहुँची हो। यह चोट शारीरिक भी हो सकती है और मानसिक, भावनात्मक या सामाजिक भी। वास्तव में मनुष्य के जीवन में ऐसी अनेक परिस्थितियाँ आती हैं, जब वह अपने भीतर से टूटता हुआ महसूस करता है। किसी के कठोर शब्द, अपमान, विश्वासघात, असफलता, उपेक्षा या प्रिय व्यक्ति से दूरी मनुष्य को भीतर तक आहत कर सकती है। किंतु आहत होना जीवन की समाप्ति नहीं, बल्कि स्वयं को समझने और मजबूत बनाने की प्रक्रिया का एक पड़ाव है।

आहत होने का वास्तविक अर्थ :

आहत व्यक्ति केवल वह नहीं है जिसे शरीर पर चोट लगी हो। यदि किसी विद्यार्थी को लगातार उसकी क्षमता पर संदेह करके हतोत्साहित किया जाए, तो वह मानसिक रूप से आहत हो सकता है। यदि किसी कर्मचारी की वर्षों की मेहनत को बिना उचित कारण नकार दिया जाए, तो उसके आत्मसम्मान को चोट पहुँच सकती है। इसी प्रकार किसी व्यक्ति के विश्वास को तोड़ना भी उसे गहराई से आहत कर सकता है।
इसलिए कहा जा सकता है कि चोट शरीर को प्रभावित करती है, जबकि अपमान और विश्वासघात मन को।

आहत होने के प्रमुख कारण :

मनुष्य के आहत होने के अनेक कारण हैं। इनमें सबसे प्रमुख है—अपेक्षाओं का टूटना। हम अपने परिवार, मित्रों और समाज से कुछ अपेक्षाएँ रखते हैं। जब वे पूरी नहीं होतीं, तो निराशा उत्पन्न होती है।
दूसरा महत्वपूर्ण कारण अपमान है। सम्मान मनुष्य की मूलभूत आवश्यकताओं में से एक है। जब किसी व्यक्ति को सार्वजनिक रूप से अपमानित किया जाता है या उसकी योग्यता को कमतर आँका जाता है, तो वह आहत हो सकता है।
तीसरा कारण असफलता है। परीक्षा में असफलता, रोजगार का न मिलना, व्यापार में नुकसान या किसी लक्ष्य की प्राप्ति न होना व्यक्ति को निराश कर सकता है। लेकिन असफलता को अंतिम सत्य मानना उचित नहीं है। इतिहास में अनेक महान व्यक्तियों ने असफलताओं से सीखकर सफलता प्राप्त की।
चौथा कारण विश्वासघात है। जिस व्यक्ति पर हम विश्वास करते हैं, यदि वही विश्वास तोड़ दे, तो मानसिक पीड़ा बहुत गहरी हो सकती है। विश्वास टूटने के बाद व्यक्ति को दूसरों पर भरोसा करने में कठिनाई हो सकती है।

आहत मन और समाज :

आहत मन केवल व्यक्ति को प्रभावित नहीं करता, बल्कि उसका प्रभाव समाज पर भी पड़ता है। यदि किसी व्यक्ति को बार-बार अपमानित किया जाए या उसकी बात को महत्व न दिया जाए, तो उसमें समाज से दूरी बनाने की भावना उत्पन्न हो सकती है। इसलिए परिवार, विद्यालय और समाज का दायित्व है कि वे प्रत्येक व्यक्ति की भावनाओं का सम्मान करें।
विशेषकर बच्चों और युवाओं के साथ व्यवहार करते समय संवेदनशीलता आवश्यक है। उनकी छोटी-सी गलती पर लगातार कठोर टिप्पणी करना उनके आत्मविश्वास को प्रभावित कर सकता है। इसके स्थान पर गलती को समझाकर सुधारने का अवसर देना अधिक प्रभावी है।

शब्दों की शक्ति :

मनुष्य के पास सबसे शक्तिशाली साधनों में से एक है—वाणी। शब्द दिखाई नहीं देते, लेकिन उनका प्रभाव लंबे समय तक रह सकता है। एक प्रेरणादायक शब्द किसी निराश व्यक्ति में आशा पैदा कर सकता है, वहीं एक कठोर शब्द उसे आहत कर सकता है।
इसलिए बोलने से पहले यह विचार करना चाहिए कि हमारे शब्द सामने वाले व्यक्ति पर क्या प्रभाव डालेंगे। आलोचना आवश्यक हो सकती है, लेकिन आलोचना और अपमान में अंतर है। व्यक्ति की गलती की आलोचना की जा सकती है, लेकिन उसके व्यक्तित्व का अपमान नहीं किया जाना चाहिए।
आहत होना कमजोरी नहीं |
अक्सर समाज में यह धारणा देखने को मिलती है कि जो व्यक्ति भावुक हो जाता है, वह कमजोर है। यह विचार उचित नहीं है। संवेदनशील होना कमजोरी नहीं बल्कि मानवीय गुण है। जो व्यक्ति स्वयं दूसरों की पीड़ा को समझता है, वही सच्चे अर्थों में सहानुभूतिशील हो सकता है।
महात्मा गांधी, गौतम बुद्ध और स्वामी विवेकानंद जैसे महान व्यक्तित्वों के विचारों में मानवता, करुणा और संवेदना को विशेष स्थान प्राप्त है। किसी भी सभ्य समाज की पहचान केवल उसकी आर्थिक समृद्धि से नहीं, बल्कि इस बात से भी होती है कि वह अपने कमजोर और पीड़ित लोगों के साथ कैसा व्यवहार करता है।

आहत होने के बाद क्या करें?

जब कोई व्यक्ति आहत होता है, तो उसके सामने सबसे बड़ी चुनौती स्वयं को संभालने की होती है। इसके लिए सबसे पहले अपनी भावनाओं को स्वीकार करना चाहिए। दुखी होना स्वाभाविक है। भावनाओं को समझना और उचित व्यक्ति से बातचीत करना मन को हल्का कर सकता है।
दूसरा, घटना से सीख लेने की आवश्यकता है। प्रत्येक कठिन अनुभव हमें कुछ न कुछ सिखाता है। यदि कोई व्यक्ति असफल हुआ है, तो उसे अपनी कमियों को पहचानकर सुधारना चाहिए। यदि किसी ने विश्वास तोड़ा है, तो भविष्य में संबंधों में अधिक विवेकपूर्ण निर्णय लेना सीखा जा सकता है।
तीसरा, आत्मविश्वास बनाए रखना आवश्यक है। किसी व्यक्ति की एक घटना या किसी दूसरे व्यक्ति की राय उसके पूरे जीवन का मूल्य निर्धारित नहीं करती। हमें अपनी क्षमताओं और प्रयासों पर विश्वास रखना चाहिए।
चौथा, क्षमा की भावना भी महत्वपूर्ण हो सकती है। क्षमा का अर्थ गलत व्यवहार को सही मान लेना नहीं है। इसका अर्थ यह है कि व्यक्ति अपने भीतर के नकारात्मक भावों का बोझ कम करने का प्रयास करे।

आहत व्यक्ति के प्रति हमारा दायित्व :

यदि हमारे आसपास कोई व्यक्ति दुखी या आहत है, तो हमें उसकी बात ध्यानपूर्वक सुननी चाहिए। हर समस्या का समाधान तुरंत देना आवश्यक नहीं होता। कई बार किसी व्यक्ति को केवल यह महसूस करने की आवश्यकता होती है कि कोई उसकी बात समझने के लिए तैयार है।
हमें यह भी ध्यान रखना चाहिए कि किसी के दुख का मजाक न बनाया जाए। सोशल मीडिया के युग में यह और भी महत्वपूर्ण हो गया है। बिना पूरी जानकारी के किसी व्यक्ति के बारे में टिप्पणी करना या उसका मजाक उड़ाना उसे मानसिक रूप से आहत कर सकता है।

आहत से आत्मबल तक :

जीवन में हर व्यक्ति को किसी न किसी समय चोट लगती है। कोई असफलता से आहत होता है, कोई संबंधों से, कोई आर्थिक कठिनाइयों से और कोई सामाजिक व्यवहार से। लेकिन इन अनुभवों से निकलकर व्यक्ति पहले से अधिक परिपक्व और मजबूत बन सकता है।

कठिनाइयाँ मनुष्य की परीक्षा लेती हैं, लेकिन वही कठिनाइयाँ उसके चरित्र का निर्माण भी करती हैं। जैसे आग में तपकर सोना अधिक शुद्ध होता है, वैसे ही संघर्षों से गुजरकर मनुष्य अधिक अनुभवी बन सकता है।
यहाँ यह समझना आवश्यक है कि हर दर्द को अकेले सहना जरूरी नहीं है। यदि किसी व्यक्ति की भावनात्मक परेशानी बहुत अधिक हो रही हो और दैनिक जीवन प्रभावित हो रहा हो, तो किसी भरोसेमंद परिवारजन, शिक्षक या योग्य पेशेवर से बात करना उचित कदम है।

“आहत” शब्द हमें मनुष्य के बाहरी नहीं, बल्कि उसके आंतरिक संसार की ओर ले जाता है। शरीर की चोट दिखाई दे सकती है, लेकिन मन की चोट अक्सर दिखाई नहीं देती। इसलिए हमें दूसरों की भावनाओं के प्रति अधिक संवेदनशील होना चाहिए।
आहत होना जीवन का अंत नहीं, बल्कि आत्मचिंतन का अवसर हो सकता है। हमें अपनी पीड़ा से सीखकर आगे बढ़ना चाहिए और दूसरों को अनावश्यक रूप से आहत करने से बचना चाहिए। परिवार में प्रेम, विद्यालय में संवेदनशीलता और समाज में सहानुभूति का वातावरण ही स्वस्थ समाज का निर्माण कर सकता है।
अंततः, मनुष्य की वास्तविक शक्ति इस बात में नहीं है कि उसे कभी चोट न लगे, बल्कि इस बात में है कि चोट लगने के बाद वह स्वयं को संभालकर कितनी मजबूती से आगे बढ़ता है। यही आहत मन को आत्मबल में बदलने की यात्रा है।

10/08/2026

विकसित भारत @ 2047 : समृद्धि, समावेशन और आत्मनिर्भरता की ओर भारत की यात्रा :

“विकसित भारत केवल आर्थिक रूप से समृद्ध भारत नहीं, बल्कि ऐसा भारत है जहाँ विकास का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुँचे।”

भारत ने 15 अगस्त 1947 को स्वतंत्रता प्राप्त की थी। स्वतंत्रता के 100 वर्ष पूरे होने पर वर्ष 2047 में भारत एक विकसित राष्ट्र के रूप में स्वयं को स्थापित करने का लक्ष्य रखता है। “विकसित भारत @ 2047” केवल आर्थिक विकास का लक्ष्य नहीं, बल्कि सामाजिक न्याय, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, तकनीकी प्रगति, पर्यावरणीय संतुलन, सुशासन और आत्मनिर्भरता पर आधारित व्यापक राष्ट्रीय दृष्टि है।

यदि स्वतंत्रता का पहला चरण राजनीतिक स्वतंत्रता प्राप्त करना था, तो 2047 का लक्ष्य आर्थिक, सामाजिक, तकनीकी और मानवीय क्षमताओं में पूर्ण विकास प्राप्त करना है।

विकसित भारत की संकल्पना :

विकसित भारत का अर्थ ऐसी अर्थव्यवस्था और समाज से है जहाँ—

उच्च आर्थिक वृद्धि + गुणवत्तापूर्ण मानव पूंजी + सामाजिक समावेशन + तकनीकी नवाचार + सुशासन + पर्यावरणीय स्थिरता = विकसित भारत

विकसित भारत के प्रमुख स्तंभ :

1. आर्थिक समृद्धि : विकसित भारत की आधारशिला

किसी भी विकसित राष्ट्र की पहली आवश्यकता मजबूत और गतिशील अर्थव्यवस्था है। भारत को उच्च आर्थिक वृद्धि के साथ रोजगारपरक विकास सुनिश्चित करना होगा।

इसके लिए—

- विनिर्माण क्षेत्र का विस्तार
- MSME को प्रोत्साहन
- स्टार्टअप एवं उद्यमिता
- कृषि का आधुनिकीकरण
- निर्यात में वृद्धि
- लॉजिस्टिक्स और बुनियादी ढाँचे का विकास
- औपचारिक रोजगार का विस्तार

आवश्यक हैं।

भारत को केवल सेवा-क्षेत्र आधारित अर्थव्यवस्था से आगे बढ़कर कृषि + उद्योग + सेवा तीनों क्षेत्रों में संतुलित विकास करना होगा।

2. मानव पूंजी : शिक्षा और कौशल

“जनसंख्या” तभी “जनसंपदा” बनती है जब उसे गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और कौशल प्राप्त हो।

राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 ने शिक्षा को अधिक समग्र, कौशल-आधारित और बहुविषयक बनाने पर बल दिया है।

विकसित भारत के लिए आवश्यक है—

- गुणवत्तापूर्ण प्राथमिक एवं माध्यमिक शिक्षा
- उच्च शिक्षा में अनुसंधान
- व्यावसायिक एवं कौशल शिक्षा
- डिजिटल शिक्षा
- AI एवं नई तकनीकों का प्रशिक्षण
- उद्योग और शिक्षा संस्थानों के बीच समन्वय

विशेषकर युवाओं को Job Seekers के बजाय Job Creators बनाने की आवश्यकता है।

3. स्वास्थ्य : स्वस्थ नागरिक, विकसित राष्ट्र

स्वास्थ्य केवल सामाजिक कल्याण का विषय नहीं, बल्कि आर्थिक उत्पादकता का भी आधार है।

भारत को—

“सस्ती स्वास्थ्य सेवा” से आगे बढ़कर “सुलभ, गुणवत्तापूर्ण और निवारक स्वास्थ्य व्यवस्था”

की ओर बढ़ना होगा।

इसके अंतर्गत प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों को मजबूत करना, मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य, पोषण, मानसिक स्वास्थ्य, टेलीमेडिसिन और आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं का विस्तार आवश्यक है।

4. कृषि एवं ग्रामीण भारत का विकास

भारत की बड़ी आबादी आज भी ग्रामीण क्षेत्रों से जुड़ी है। इसलिए गाँवों के विकास के बिना विकसित भारत की कल्पना अधूरी है।

कृषि को केवल उत्पादन तक सीमित न रखकर—

उत्पादन → प्रसंस्करण → पैकेजिंग → भंडारण → विपणन → निर्यात

की पूरी मूल्य-श्रृंखला से जोड़ना होगा।

कृषि में ड्रोन, सेंसर, मौसम आधारित सलाह, सूक्ष्म सिंचाई और डिजिटल बाजार किसानों की आय एवं उत्पादकता बढ़ाने में सहायक हो सकते हैं।

5. विज्ञान, तकनीक और नवाचार

21वीं सदी में किसी राष्ट्र की शक्ति केवल प्राकृतिक संसाधनों से नहीं, बल्कि ज्ञान और तकनीकी क्षमता से निर्धारित होती है।

भारत को AI, सेमीकंडक्टर, अंतरिक्ष, जैव-प्रौद्योगिकी, क्वांटम कंप्यूटिंग, रोबोटिक्स और हरित तकनीक जैसे क्षेत्रों में अग्रणी भूमिका निभानी होगी।

भारत की डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना ने यह दिखाया है कि तकनीक को बड़े पैमाने पर जनकल्याण से जोड़ा जा सकता है।

6. महिला सशक्तीकरण

विकसित भारत का सपना तब तक पूरा नहीं हो सकता जब तक महिलाओं की आर्थिक और सामाजिक भागीदारी पूरी तरह सुनिश्चित न हो।

महिलाओं की—

- शिक्षा
- स्वास्थ्य
- सुरक्षा
- संपत्ति तक पहुँच
- रोजगार
- उद्यमिता
- राजनीतिक भागीदारी

को बढ़ाना आवश्यक है।

महिला विकास से आगे बढ़कर महिला-नेतृत्व वाले विकास की दिशा में आगे बढ़ना विकसित भारत की महत्वपूर्ण शर्त है।

7. सामाजिक न्याय और समावेशन

विकास का वास्तविक अर्थ तभी है जब उसका लाभ समाज के कमजोर वर्गों तक पहुँचे।

SC, ST, OBC, अल्पसंख्यक, दिव्यांग, गरीब, ग्रामीण और वंचित वर्गों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ना आवश्यक है।

इसीलिए विकसित भारत का मॉडल होना चाहिए—

“सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास।”

8. पर्यावरणीय स्थिरता

विकास और पर्यावरण के बीच संतुलन आज की सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक है।

भारत को आर्थिक विकास के साथ—

- नवीकरणीय ऊर्जा
- ऊर्जा दक्षता
- इलेक्ट्रिक मोबिलिटी
- जल संरक्षण
- वनीकरण
- सर्कुलर इकोनॉमी
- स्वच्छ उत्पादन

को बढ़ावा देना होगा।

2047 का विकसित भारत Green India भी होना चाहिए।

9. सुशासन और संस्थागत सुधार

विकसित राष्ट्रों की पहचान केवल उनकी GDP से नहीं, बल्कि उनकी संस्थाओं की गुणवत्ता से भी होती है।

आवश्यक सुधार हैं—

पारदर्शिता + जवाबदेही + डिजिटल प्रशासन + भ्रष्टाचार नियंत्रण + न्यायिक सुधार + पुलिस सुधार

ई-गवर्नेंस से सेवाओं को नागरिकों तक तेज और पारदर्शी तरीके से पहुँचाया जा सकता है।

बिहार और विकसित भारत :

बिहार के विकास के बिना विकसित भारत का लक्ष्य पूर्ण नहीं हो सकता।

बिहार के लिए विकास के प्रमुख क्षेत्र हैं—

1. कृषि

उपजाऊ भूमि का वैज्ञानिक उपयोग, सिंचाई और कृषि-प्रसंस्करण को बढ़ावा।

2. शिक्षा

स्कूलों की गुणवत्ता, उच्च शिक्षा, तकनीकी शिक्षा और कौशल विकास को मजबूत करना।

3. उद्योग

खाद्य प्रसंस्करण, वस्त्र, मखाना, हस्तशिल्प, कृषि-आधारित उद्योग और MSME को प्रोत्साहन।

4. रोजगार

स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर पैदा करके पलायन को कम करना।

5. आधारभूत संरचना

सड़क, बिजली, सिंचाई, इंटरनेट और लॉजिस्टिक्स का विस्तार।

6. पर्यटन

बोधगया, नालंदा, राजगीर, वैशाली, पटना साहिब आदि को विश्वस्तरीय पर्यटन केंद्रों के रूप में विकसित करना।

बिहार की युवा आबादी उसकी सबसे बड़ी शक्ति बन सकती है, यदि उसे शिक्षा + कौशल + रोजगार + उद्यमिता से जोड़ा जाए।

विकसित भारत की प्रमुख चुनौतियाँ :

भारत के सामने अनेक चुनौतियाँ हैं—

1. बेरोजगारी एवं रोजगार की गुणवत्ता
2. क्षेत्रीय असमानता
3. ग्रामीण-शहरी अंतर
4. गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की कमी
5. स्वास्थ्य सुविधाओं में असमानता
6. कृषि संकट
7. पर्यावरणीय दबाव
8. तकनीकी एवं डिजिटल असमानता
9. सामाजिक असमानता
10. संस्थागत एवं प्रशासनिक चुनौतियाँ

इन चुनौतियों का समाधान दीर्घकालीन नीति, मजबूत संस्थाओं और निरंतर राजनीतिक इच्छाशक्ति से ही संभव है।

पाँच प्राथमिकताएँ :

पहली— शिक्षा और स्वास्थ्य में बड़े पैमाने पर निवेश।

दूसरी— रोजगारपरक आर्थिक विकास और विनिर्माण को बढ़ावा।

तीसरी— अनुसंधान, विज्ञान एवं नवाचार को राष्ट्रीय प्राथमिकता।

चौथी— महिलाओं और युवाओं को विकास की केंद्रीय शक्ति बनाना।

पाँचवीं— पर्यावरण संरक्षण के साथ सतत विकास सुनिश्चत

विकसित भारत @ 2047 केवल एक सरकारी कार्यक्रम नहीं, बल्कि एक राष्ट्रीय संकल्प है। इसका वास्तविक अर्थ ऐसी व्यवस्था बनाना है जिसमें आर्थिक विकास के साथ सामाजिक न्याय, तकनीकी प्रगति, पर्यावरण संरक्षण और मानवीय गरिमा सुनिश्चित हो।

भारत के पास विशाल युवा शक्ति, लोकतांत्रिक संस्थाएँ, बढ़ती डिजिटल क्षमता, उद्यमशीलता और समृद्ध सांस्कृतिक विरासत जैसी अनेक शक्तियाँ हैं। आवश्यकता है कि इन शक्तियों को सही दिशा, गुणवत्तापूर्ण संस्थाओं और दीर्घकालीन नीतियों से जोड़ा जाए।

महात्मा गांधी का “अंत्योदय” का विचार विकसित भारत की विकास-दृष्टि के लिए आज भी प्रासंगिक है—विकास का अंतिम लक्ष्य समाज के अंतिम व्यक्ति के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाना होना चाहिए।

“2047 का विकसित भारत वह भारत होना चाहिए जो आर्थिक रूप से शक्तिशाली, सामाजिक रूप से समावेशी, तकनीकी रूप से आत्मनिर्भर, पर्यावरणीय रूप से सतत और मानवीय मूल्यों से समृद्ध हो।”

यही स्वतंत्रता के 100वें वर्ष में भारत के लिए सबसे सार्थक उपलब्धि होगी।

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