Saraswati Shishu Mandir higher secondary school Deviganj Road Ambikapur

  • Home
  • India
  • Ambikapur
  • Saraswati Shishu Mandir higher secondary school Deviganj Road Ambikapur

Saraswati Shishu Mandir higher secondary school Deviganj Road Ambikapur Contact information, map and directions, contact form, opening hours, services, ratings, photos, videos and announcements from Saraswati Shishu Mandir higher secondary school Deviganj Road Ambikapur, School, Deviganj Road, Ambikapur.

12/02/2024

आप सभी सूचित हो कि 14 फरवरी को विद्यारंभ संस्कार होना है, इसके लिए आप लोग अपने आसपास के छोटे-छोटे बच्चों को विद्यारंभ संस्कार के लिए बच्चों को सुबह 9:00 विद्यालय में लेकर आवे l

12/02/2024

सरस्वती शिशु मंदिर देवीगंज रोड अंबिकापुर में पूर्व छात्रों की बैठक दिनांक 13 /02 /2024 दिन मंगलवार को दोपहर 12 बजे से आयोजित है। उक्त बैठक में आपकी उपस्थिति सादर प्रार्थनीय है।

11/01/2024
अदम्य वीरता और साहस की प्रतिमूर्ति वीरांगना रानी दुर्गावती को उनकी जयंती पर विद्यालय परिवार ने नमन कर पुष्पांजलि अर्पित ...
10/10/2023

अदम्य वीरता और साहस की प्रतिमूर्ति वीरांगना रानी दुर्गावती को उनकी जयंती पर विद्यालय परिवार ने नमन कर पुष्पांजलि अर्पित की।
रानी दुर्गावती का जन्म 5 अक्टूबर 1524 को कालिंजर के राजा पृथ्वी सिंह चंदेल के यहाँ हुआ था। रानी दुर्गावती का राज्य गढ़मंडला था। इसका केन्द्र जबलपुर था।
अपने पति गोंड राजा दलपत शाह की असामयिक मृत्यु के बाद वे स्वयं अपने पुत्र वीर नारायण की संरक्षिका बनकर शासन करने लगीं। मुगल शासक अकबर रानी दुर्गावती के सुखी और समृद्ध राज्य को जीतना चाहता था। अकबर ने आसफ़ खाँ के नेतृत्व में गोंडवाना साम्राज्य पर आक्रमण किया। युद्ध में कई मुग़ल सैनिक मारे गए, लेकिन रानी को भी भारी क्षति हुई। रानी अंत तक वीरतापूर्वक युद्ध करती रहीं। अंततः रानी 24 जून 1564 को अपनी ही कटार अपनी छाती में भोंककर आत्म-बलिदान के पथ पर चल पड़ीं।

विद्यालय के आचार्य श्री वीरेंद्र गुप्ता जी के द्वारा स्वरचित कविता
13/09/2023

विद्यालय के आचार्य श्री वीरेंद्र गुप्ता जी के द्वारा स्वरचित कविता

11/09/2023

*🌳 भगवान जगन्नाथ जी की तुलसीदास जी पर कृपा 🌳*

एक बार तुलसीदास जी महाराज को किसी ने बताया की जगन्नाथ जी मैं तो साक्षात भगवान ही दर्शन देते हैं बस फिर क्या था सुनकर
तुलसीदास जी महाराज तो बहुत ही प्रसन्न हुए और अपने इष्टदेव का दर्शन करने श्रीजगन्नाथपुरी को चल दिए।

महीनों की कठिन और थका देने वाली यात्रा के उपरांत जब वह जगन्नाथ पुरी पहुंचे तो मंदिर में भक्तों की भीड़ देख कर प्रसन्न मन से अंदर प्रविष्ट हुए।

जगन्नाथ जी का दर्शन करते ही उन्हें बड़ा धक्का सा लगा वह निराश हो गये। और विचार किया कि यह हस्तपाद विहीन देव हमारे जगत में सबसे सुंदर नेत्रों को सुख देने वाले मेरे इष्ट श्री राम नहीं हो सकते।

इस प्रकार दुखी मन से बाहर निकल कर दूर एक वृक्ष के तले बैठ गये। सोचा कि इतनी दूर आना ब्यर्थ हुआ। क्या गोलाकार नेत्रों वाला हस्तपाद विहीन दारुदेव मेरा राम हो सकता है? कदापि नहीं।

रात्रि हो गयी, थके-माँदे, भूखे-प्यासे तुलसी का अंग टूट रहा था।

अचानक एक आहट हुई। वे ध्यान से सुनने लगे। अरे बाबा ! तुलसीदास कौन है.? एक बालक हाथों में थाली लिए पुकार रहा था।

आपने सोचा साथ आए लोगों में से शायद किसी ने पुजारियों को बता दिया होगा कि तुलसीदास जी भी दर्शन करने को आए हैं, इसलिये उन्होने प्रसाद भेज दिया होगा आप उठते हुए बोले - 'हाँ भाई ! मैं ही हूँ तुलसीदास!

बालक ने कहा, 'अरे ! आप यहाँ हैं। मैं बड़ी देर से आपको खोज रहा हूँ।

बालक ने कहा -'लीजिए, जगन्नाथ जी ने आपके लिए प्रसाद भेजा है।

तुलसीदास बोले -- भैया कृपा करके इसे बापस ले जायें। बालक ने कहा, आश्चर्य की बात है, "जगन्नाथ का भात-जगत पसारे हाथ" और वह भी स्वयं महाप्रभु ने भेजा और आप अस्वीकार कर रहे हैं। कारण..............?

तुलसीदास बोले, 'अरे भाई ! मैं बिना अपने इष्ट को भोग लगाये कुछ ग्रहण नहीं करता। फिर यह जगन्नाथ का जूठा प्रसाद जिसे मैं अपने इष्ट को समर्पित न कर सकूँ, यह मेरे किस काम का.?' बालक ने मुस्कराते हुए कहा अरे, बाबा ! आपके इष्ट ने ही तो भेजा है।

तुलसीदास बोले - यह हस्तपाद विहीन दारुमूर्ति मेरा इष्ट नहीं हो सकता।

*बालक ने कहा कि फिर आपने अपने श्रीरामचरितमानस में यह किस रूप का वर्णन किया है --*

*"बिनु पद चलइ सुनइ बिनु काना।*
*कर बिनु कर्म करइ बिधि नाना॥*
*आनन रहित सकल रस भोगी।*
*बिनु बानी बकता बड़ जोगी॥"*

अब तुलसीदास की भाव-भंगिमा देखने लायक थी। नेत्रों में अश्रु-बिन्दु, मुख से शब्द नहीं निकल रहे थे। थाल रखकर बालक यह कहकर अदृश्य हो गया कि मैं ही तुम्हारा राम हूँ। मेरे मंदिर के चारों द्वारों पर हनुमान का पहरा है। विभीषण नित्य मेरे दर्शन को आता है। कल प्रातः तुम भी आकर दर्शन कर लेना।

तुलसीदास जी की स्थिति ऐसी की रोमावली रोमांचित थी, नेत्रों से अस्त्र अविरल बह रहे थे, और शरीर की कोई सुध ही नहीं उन्होंने बड़े ही प्रेम से प्रसाद ग्रहण किया।

प्रातः मंदिर में जब तुलसीदास जी महाराज दर्शन करने के लिए गए तब उन्हें जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा के स्थान पर श्री राम, लक्ष्मण एवं जानकी के भव्य दर्शन हुए। भगवान ने भक्त की इच्छा पूरी की।

जिस स्थान पर तुलसीदास जी ने रात्रि व्यतीत की थी, वह स्थान 'तुलसी चौरा' नाम से विख्यात हुआ। वहाँ पर तुलसीदास जी की पीठ 'बड़छता मठ' के रूप में प्रतिष्ठित है।

22/08/2023
10वीं एवं 12वीं बोर्ड परीक्षा में प्रथम स्थान प्राप्त होने पर भैया बहनों को पुरस्कार एवं सम्मान के साथ आगे बढ़ाने की प्र...
22/08/2023

10वीं एवं 12वीं बोर्ड परीक्षा में प्रथम स्थान प्राप्त होने पर भैया बहनों को पुरस्कार एवं सम्मान के साथ आगे बढ़ाने की प्रेरणा देते हुए ।

Police line ground me  bahno dwara lezim Nirtya ki prastuti dene par tritiya puraskar prapat
22/08/2023

Police line ground me bahno dwara lezim Nirtya ki prastuti dene par tritiya puraskar prapat

कृमि की दवा  एल्बेंडाजोल की भैया एवं बहनों को खिलाया गया l
12/08/2023

कृमि की दवा एल्बेंडाजोल की भैया एवं बहनों को खिलाया गया l

आचार्य  प्रफुल्ल चंद्र राय जयंती पर भैया बहनों द्वारा रंगोली प्रतियोगिता कराया गया
05/08/2023

आचार्य प्रफुल्ल चंद्र राय जयंती पर भैया बहनों द्वारा रंगोली प्रतियोगिता कराया गया

Address

Deviganj Road
Ambikapur

Alerts

Be the first to know and let us send you an email when Saraswati Shishu Mandir higher secondary school Deviganj Road Ambikapur posts news and promotions. Your email address will not be used for any other purpose, and you can unsubscribe at any time.

Contact The School

Send a message to Saraswati Shishu Mandir higher secondary school Deviganj Road Ambikapur:

Shortcuts

Share

Category