RN Movie Clips

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RN Movie Clips मैं आप सभी का हार्दिक स्वागत एवं अभिनंदन जीवन का सार है। हंसते रहिए मुस्कुराते रहिए और दूसरों का चेहरे पर मुस्कान लाते रहिए।

31/12/2025

l यार रंगदार है l Sharma, Tiwari l Yaar Rangadar Hai l New Bhojpuri Song

11/11/2025

Bollywood के दिग्गज हीरो Dharmendra जी का हुआ निधन 🙏💔😢

25/10/2025
25/10/2025
24/08/2025

जब अमेरिका का एक बड़ा नेता, डोनाल्ड ट्रंप, अपनी सोशल मीडिया पर चिल्लाया: "भारत पर 50% टैरिफ लगाऊंगा!"

यूरोपियन यूनियन ने शोर मचाया, जापान ने बैठकर सौदा करने की कोशिश की, और चीन ने सीधा पलटवार कर दिया।

लेकिन भारत?
बस शांत। न कोई भाग-दौड़, न वॉशिंगटन की तरफ दौड़, न कोई हड़बड़ी वाली मीटिंग। सिर्फ सन्नाटा...

क्यों....?
क्योंकि अमेरिका के साथ खेला हो गया..

टैरिफ के मार से भारत की "आह" तक नहीं निकली..
क्यों? क्या मोदी का घमंड था? या अंधा देशभक्ति का जोश?

नहीं...
बिलकुल नहीं...!! ये तो एक लंबी, गहरी साजिश थी,
जो 11 साल पहले शुरू हुई थी।

साल 2014....
मोदी प्रधानमंत्री बने ही थे, तभी NSA अजीत डोभाल ने उनसे कहा, "सर, अगर भारत सुपरपावर बनना चाहता है, तो अमेरिका का दबाव सहने की तैयारी करनी पड़ेगी।

असली दुश्मन चीन नहीं, बल्कि हमारी कमजोरियां हैं – डॉलर की जकड़न, तेल पर दूसरों का कब्जा, और हथियारों की निर्भरता।"

मोदी ने पूछा, "तो क्या करें?"

डोभाल ने जवाब दिया, "खतरे से दूर रहना है अमेरिका से दुश्मनी नहीं। लेकिन भारत पहले खाड़ी और अफ्रीका के देशों से दोस्ती बढ़ाये। अपनी नौसेना मजबूत करे, और अपना बाजार को हथियार बनाये।"

बस, योजना शुरू हो गई। जैसे कोई योद्धा अपना कवच गढ़ता है, वैसे ही साल दर साल ये चलती रही।

शुरुआत 2014 में 'मेक इन इंडिया' से।
फिर 2015 में कतर से गैस का सौदा दोबारा तय किया। 2016-17 में UPI और GST लाए, जो डिजिटल अर्थव्यवस्था की रीढ़ बने।

2018 में ईरान पर अमेरिकी पाबंदी आई, तो हमने अपना सिस्टम बनाया जो पाबंदी से बचाए।
2019 में इलेक्ट्रॉनिक्स पॉलिसी – अब सिर्फ जोड़ना नहीं, बल्कि पार्ट्स खुद बनाना। 2020 में PLI स्कीम, 1.97 लाख करोड़ की।

2021 में तेल का रिजर्व स्टॉक। 2022 में INS विक्रांत जहाज, UAE और ऑस्ट्रेलिया से व्यापार समझौते।

2023 में UPI को विदेश से जोड़ा, रुपए में व्यापार शुरू। 2024 में अग्नि-V मिसाइल टेस्ट, कतर से 20 साल का गैस डील, और चाबहार बंदरगाह।

और 2025 में सर्विस एक्सपोर्ट 387.5 अरब डॉलर तक पहुंचा, अमेरिका का 25% टैरिफ आया, लेकिन असर? जीरो।

ये घमंड नहीं था, भाई।
ये कवच था – मजबूत, अटूट।

2013 में GDP 1.86 ट्रिलियन डॉलर थी,
2025 में 4.19 ट्रिलियन – दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था। PPP में 17.65 ट्रिलियन। रफ्तार 6-8%। गरीबी आधी हो गई। FDI 300 अरब$ से ऊपर।

हां, रास्ता कठिन था। टैक्स भारी पड़े, दर्द हुआ। लेकिन ये आग की परीक्षा थी, जो स्टील को मजबूत बनाती है। अब टैरिफ हमारी जंजीर नहीं, बल्कि हमारी ढाल से टकराते हैं।

वो पुराना भारत, जो अमेरिका के आगे झुकता था, वो खत्म हो चुका। यहां कोई राजा का नुमाइंदा नहीं, कोई कठपुतली नहीं।

अब हम अपनी चाय पीते हैं, अपने जहाज गिनते हैं, अपने समंदर की रखवाली करते हैं, और अपनी कमाई पर किसी की दया नहीं मांगते।

मोदी को गालियां मिलेंगी, आलोचना होगी।
लेकिन ये कवच भारत का है।

और अब सवाल पश्चिम से है: "जब भारत नहीं झुकेगा, तो तुम्हारा अगला दांव क्या होगा, साहब?"

क्योंकि उस इटालियन पप्पू से वोट-चोरी की कितनी भी नौटंकी करा लो मोदी ना तो रुकने वाला ना तो भारत अब झुकने वाला है।

कमेंट में जय हिन्द लिखना न भूलें...
जय हिन्द.... 🇮🇳

19/08/2025

" भारत देश "
यह बिल्कुल सत्य है। ऑपरेशन ३७ डीप स्टेट ऑलरेडी शुरू हो चुका है मोदी सरकार गिराने का जिसमें US प्रेसिडेंट ने CIA और deep state को मोदी को हटाने को १२ महीने का समय दिया है जिसके tools होंगे Division, Diversion एंड Deception जिसके लिए वोट चोरी,और operation 37 जिसका जगदीप धनखड़ का उदाहरण अपने देखा और उनका लक्ष्य है भाजपा के कम से कम ३७ सांसदों को तोड़ कर भाजपा में फूट डालना कभी टैरिफ के नाम पर, कभी आरक्षण के नाम पर और कभी दलाल किसान नेताओं के माध्यम से और जातीय और धार्मिक उन्माद पैदा करके भारत में बांग्लादेश जैसी अराजकता पैदा कर कर तख्ता पलट करने का प्रयास किया जाएगा। दक्षिण और महाराष्ट्र का हिन्दी विरोध, जन्माष्टमी पर बीफ खाने की कुछ नेताओं द्वारा घोषणा इसका एक और उदाहरण है।
डायवर्शन का अर्थ है भाजपा के कोर वोटर्स पर प्रहार कर उस वोट तो छिटकाना जिसके प्रयास शुरू हो चुके है जैसे कंस्टीट्यूशन क्लब का चुनाव जिसे पहले लोगों ने सुना भी नहीं था, अगला प्रधानमंत्री कौन, अमित शाह या योगी के नाम पर देश के हिंदुओं में फूट डालना आदि। साथ ही पाकिस्तान को उकसा कर भारत के साथ एक यूक्रेन रूस की भांति लंबे युद्ध के लिए भारत को उलझा कर उसकी अर्थव्यवस्था को तहस नहस करना भी एक tool होगा।
यह निश्चित है कि १२ महीने में यदि विपक्ष, डीप स्टेट और ट्रंप मोदी को कुर्सी से नहीं हटा पाए तो उन पर जान लेवा हमला भी कराने से नहीं चूकेंगे, क्योंकि भारत की उन्नति USA के पतन का कारण बन रही है। आज USA सबसे ज्यादा कर्जे में डूबा देश है और वह नहीं चाहता भारत आगे बढ़े।

भारत आज सबसे कठिन समय से गुजर रहा है आज हिंदुओं को देश और स्वयं को बचाने के लिए एकजुट खड़े होने की सबसे अधिक आवश्यकता है और दूसरा वर्ग आपके साथ कभी खड़ा नहीं होगा क्योंकि इससे उसका गजवा ए हिंद का मकसद पूरा होता है।

जागो , एकजुट बने रहना, सचेत रहें, और अपने रिश्तेदारों, मित्रों और पड़ोसियों को सचेत रखें।

*जयहिंद भारत माता की जय वंदे मातरम्*🙏🏼
🇮🇳🚩 आनंद मोहन भटनागर

19/08/2025

*प्रायः मैं दिन में सिर्फ दो बार चाय पीता हूँ लेकिन न जाने क्यों, कल शाम की चाय के बाद सोचने लगा और फिर ख्याल आया कि :*

1.यूपी से सरकार चले जाने के बाद अखिलेश यादव ने सैफई महोत्सव क्यों नहीं मनाया ??😳

2.बसपा सरकार जाने के बाद मायावती के जन्मदिन पर उसे हीरे, ताज, नोटों से क्यों नहीं तौला गया ???? 🤔

3.यूपी में योगी जी के सीएम बनने के बाद अब अतीक अहमद, आजम खान, मुख्तार अंसारी जैसा बाहुबली क्यों नहीं पैदा हुआ है ????? 😍

4.मोदी के आने के बाद , पी. चिदंबरम अपने बंगले के गमलों में 6 करोड़ की गोभी क्यों नहीं उगा पा रहा है ??? 🤔🤔

5.आजकल सुप्रिया सुले अपनी दस एकड़ जमीन में 670 करोड़ की फसल क्यों नहीं उगा पाती हैं ???😀

6.हरियाणा में कांग्रेस की सरकार चले जाने के बाद रोबर्ट वाड्रा ने वहाँ कोई जमीन क्यों नहीं खरीदी ???😘

7.कांग्रेस सरकार जाने के बाद मुंबई में फिर कोई हाजी़ मस्तान, करीम लाला, दाऊद इब्राहिम पैदा क्यों नहीं हुआ ???😳

8.यस बैंक के मालिक राणा कपूर को ढाई करोड़ की पेंटिंग बेचने के बाद, प्रियंका गांधी ने फिर कोई पेंटिंग क्यों नहीं बेची ??😂

9.ए. के. एंटनी ने अपनी पत्नी के हाथ की पेंटिंग सरकार को 28 करोड़ में बेचने के बाद अपनी पत्नी से फिर कोई पेंटिंग क्यों नहीं बनवाई ???😀

10.यूपीए के दस वर्षीय (2004-14) शासनकाल में सोनिया अपनी *अज्ञात* बीमारी के इलाज के लिये प्रत्येक छ: माह के अन्तराल पर "अज्ञात" देश को नियमित रुप से जाती थी.
वह रहती दिल्ली में है पर उसकी उडा़न हमेशा केरल के एयरपोर्ट से होती थी और उसके लगेज में 4-5 बडे़-बडे़ ट्रंक हमेशा हुआ करते थे 🤔
किसी प्रकार की सिक्योरिटी-चेक का सवाल ही नहीं था क्योंकि वह उस समय भारत की "सुपर पीएम" थी. 2014 में सत्ता परिवत्तॆन के बाद आश्चयॆजनक रुप से सोनिया की "अज्ञात" बीमारी उड़न छू कैसे हो गई ???😀

*कल फिर कडक चाय पिऊंगा और फिर सोंचूँगा! आप भी एक बार इस बारे में जरूर सोचना!! प्रश्न वाकई गंभीर है.*☕✒️

*आपका अपना निष्पक्ष जन सेवक*

18/08/2025

आप क्रोनोलॉजी समझिए— अमेरिकन चाल / विपक्ष..
ये कोई इत्तेफाक नहीं, बल्कि अमेरिका और उसके पाले हुए भारतीय दलालों की सुनियोजित साजिश है...

ऐसा “षड्यंत्र” पहले भी हो चुका है।
अब यह दोहराया नहीं, बल्कि तिहराया जा रहा है..

क्या भारत में “मोदी” की बिदाई तय है..❓

अमेरिका के खिलाफ जाने की सजा इमरान खान जेल में काट रहा है तो शेख हसीना छुपकर रह रही हैं। अब मोदी जी के खिलाफ क्या चल रहा है.. ❓

2022 में पाकिस्तान में इमरान ख़ान हटे। चुनाव जीतने के बाद "वोटर फ्रॉड" का ढोल पीटा गया। भीड़ को भड़काया गया।

और नतीजा—वो सरकार बैठी जो व्हाइट हाउस के इशारे पर नाचती है। पाकिस्तान का लोकतंत्र बर्बाद, अर्थव्यवस्था गिरवी, और देश का भविष्य अमेरिका की मुट्ठी में।

2024 में बांग्लादेश में यही खेल। शेख़ हसीना को हटाया, "वोटर फ्रॉड" का नारा दिया, और अमेरिका के पाले हुए पिट्ठुओं को कुर्सी पर बैठा दिया।

परिणाम—देश के फैसले अब ढाका में नहीं, वॉशिंगटन में होते हैं।

अब 2025 में भारत की बारी....
पप्पू और उसकी भिखारी मंडली, जो चुनाव दर चुनाव जनता से ठुकराई जाती है, वही "वोटर फ्रॉड" का नया राग गा रही है।

इनकी औकात इतनी नहीं कि पंचायत चुनाव जीत लें, लेकिन हिम्मत देखिए—अमेरिका के पैरों में बैठकर दिल्ली की सत्ता पर कब्जा करने का सपना देख रहे हैं।

अमेरिका को भारत का मजबूत नेतृत्व पसंद नहीं—क्योंकि मोदी जी और भारत झुकते नहीं, बिकते नहीं। इसलिए उसने अपने एजेंटों को एक्टिव किया—NGO, मीडिया के दलाल, और विपक्ष के भूखे भेड़िये....

इनका टारगेट है भारत में ‘रेजीम चेंज’। मतलब—देश की चुनी हुई, राष्ट्रवादी सरकार को गिराकर, एक कमजोर, कट्टरपंथियों को खुश करने वाली, और विदेशी टुकड़ों पर पलने वाली सरकार बैठाना।

अमेरिका का इतिहास गवाह है—
जहां भी उसकी कठपुतली सरकारें बैठीं, वहां खून, गरीबी और अराजकता आई। और भारतीय विपक्ष? ये वो गिद्ध हैं जो देश की लाश पर राजनीति करना चाहते हैं।

इन्हें सत्ता चाहिए,
चाहे इसके लिए भारत की संप्रभुता बेचनी पड़े, चाहे विदेशी एजेंडा लागू करना पड़े।

लोकतंत्र का मतलब अमेरिका की दासी बनना नहीं है। लोकतंत्र का मतलब है—अपने लोगों के भरोसे को निभाना, अपने राष्ट्र के लिए जीना, और हर विदेशी दबाव को ठुकराना।

अगर पप्पू और उसके टुकड़े-टुकड़े गैंग की चाल कामयाब हुई, तो भारत का प्रधानमंत्री जनता नहीं चुनेगी, बल्कि व्हाइट हाउस तय करेगा।

देशभक्तो, समय आ गया है—
इन बिके हुए दलालों और विदेशी आका के खिलाफ सीधी लड़ाई छेड़ने का। यह सिर्फ चुनावी जंग नहीं, यह भारत की अस्मिता, सम्मान और अस्तित्व की जंग है।

अगर आज नहीं लड़े, तो कल आपकी औलादें गुलामी में पैदा होंगी।

लड़ो…
और धर्म, राष्ट्र, भारत के साथ खड़े रहो—अमेरिका के इशारे पर नाचने वालों को सत्ता तक न पहुंचने दो।

भारत किसी का गुलाम नहीं बनेगा—ये अंतिम चेतावनी है। आने वाले दिनों में भारत में एक बहुत बड़ा आंदोलन खड़ा होने वाला है यह मेरा आकलन है।

इस आंदोलन को विफल करना है...

आपका स्टैंड तय करेगा कि...
क्या मोदी जी का झोला उठाकर हिमालय जाने का समय आ गया है या हम भारतीय मोदी जी के साथ खड़े होने का सामर्थ्य रखते हैं..?

अगर आप इस आने वाली लड़ाई में मोदी जी के साथ खड़े हैं तो कमेंट में बता दीजिए..

नमो नमो... 🇮🇳

✍️ #बक्क्षीघात

18/08/2025

⚠️ सभी राष्ट्रवादियों को यह ज़रूर सुनना और समझना होगा — अगले डेढ़ साल भारत का भाग्य तय करेंगे। ⚠️

चीन, पाकिस्तान और अमेरिका का डीप स्टेट भारत में पूरी ताकत से काम कर रहे हैं।
अगर हम सतर्क नहीं रहे, तो हमें बांग्लादेश जैसी बर्बादी का सामना करना पड़ सकता है — यहीं हमारे देश में।

सीआईए ने ऑपरेशन शुरू किया है: ध्यान भटकाना, धोखा देना और बाँटना।
उनके पास 12-16 महीने हैं:

- भाजपा को अंदर से तोड़ने के लिए

- आरएसएस के नेताओं में भ्रम पैदा करने के लिए

- और अंततः हासिल करने के लिए:

"मोदी को जाना ही होगा"

कथित तौर पर उन्होंने अपने लिए काम करने के लिए 32-38 सांसदों और 20-42 विपक्षी नेताओं को चुना है।

पिछले कुछ दिनों में, आपने इसके संकेत देखे होंगे:

- राहुल गांधी युवाओं को गुमराह करने के लिए चुनाव आयोग और सरकार के खिलाफ फर्जी खबरें फैला रहे हैं

- दिल्ली में कांग्रेस का विरोध प्रदर्शन

भारत विरोधी सोशल मीडिया हैंडल दुष्प्रचार को बढ़ावा दे रहे हैं

एक बार-बार दोहराया जाने वाला खतरनाक बयान: "अगर चुनाव आयोग और सरकार जवाब नहीं देते हैं, तो गृहयुद्ध हो सकता है" -

यह है सीआईए शैली की एक सीधी अस्थिरता फैलाने की रणनीति।

अगर यह नहीं रुका, तो आगे क्या होने वाला है:

- वामपंथी छात्र विरोध प्रदर्शनों में अवैध बांग्लादेशी, रोहिंग्या और स्लीपर सेल के सहयोग के साथ प्रदर्शन करेंगे।

- अराजकता बढ़ाने के लिए विपक्षी नेताओं द्वारा समन्वित गलत सूचनाएँ दी जाएगीं।

- कई शहरों में संस्कृति, कला और धर्म के नाम पर एक साथ विरोध प्रदर्शन होगा।

- निवेशकों का विश्वास डगमगाने और भारत की अर्थव्यवस्था को हिलाने के लिए शेयर बाजार में हेरफेर किया जाएगा। (जेन स्ट्रीट शैली की तरह)।

- अंतर्राष्ट्रीय मीडिया दुष्प्रचार भारत को "शांतिपूर्ण छात्रों को दंडित करने" के रूप में पेश कर रहा है ताकि हमारी वैश्विक छवि को नुकसान पहुँचाया जा सके।

📢 हर भारतीय के लिए मेरा संदेश:

आपके पास स्मार्टफोन हैं। आपके पास सोशल मीडिया है। इनका इस्तेमाल अपने देश के लिए करें।

झूठ का पर्दाफ़ाश करें। फ़र्ज़ी ख़बरों का खंडन करें। अपनी सरकार के साथ खड़े हों।

क्योंकि अगर हम अभी हार गए तो:

- हम दुनिया की सबसे तेज़ी से बढ़ती अर्थव्यवस्था को कई दशकों के लिए खो देंगे।

- हम एक ऐसे नेता को खो देंगे जिसका विज़न भारत को पूरे विश्व के हर क्षेत्र में महान बनाना है।

- हम रणनीतिक स्वायत्तता खो देंगे, विदेशी ताकतों के मोहरे बन जाएँगे

- और सबसे बुरी बात यह है कि हम अपनी ही धरती पर अल्पसंख्यक बनने का जोखिम उठाएँगे।

मेरे शब्दों पर ध्यान दीजिए - दुनिया भारत के उत्थान, हमारे विकास या वैश्विक स्तर पर हमारे द्वारा अर्जित सम्मान को पचा नहीं पा रही है। इसीलिए वे सभी हमें अस्थिर करने की कोशिश कर रहे हैं।

तो अब, यह आपकी बारी है:
🇮🇳 एक मज़बूत, शांतिपूर्ण भारत - सबसे तेज़ी से बढ़ती अर्थव्यवस्था, एक रक्षा निर्यातक और शीर्ष वैश्विक शक्तियों का प्रतिस्पर्धी

या

बांग्लादेश, अफ़ग़ानिस्तान, पाकिस्तान, इराक या म्यांमार जैसा एक टूटा हुआ देश - कोई अर्थव्यवस्था नहीं, कोई भविष्य नहीं, कोई बुनियादी ढाँचा नहीं, विदेशी हितों का गुलाम।

अभी खड़े हो जाइए। एकजुट हो जाइए। भारत की रक्षा कीजिए। या फिर बाद में हमेशा पछताते रहिए, क्योंकि पश्चिम की नजर में भारत की छवि हमेशा मदारियों और सपेरों का देश रहा, भारत को विदेशी स्वालंवी और विश्व शक्ति बनते हुए कैसे बर्दाश्त कर सकते हैं। 🇮🇳

चॉइस इस योर्स ❗

18/08/2025

तमाम लोगों को लगता है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कमजोर नस अराजक तत्वों का स्ट्रीट पॉवर है। यदि अराजक तत्व सड़क पर उतर जाते हैं तो प्रधानमंत्री समेत पूरी सरकार अक्षम नजर आती है। ऐसा लगता है कि सरकार का इक़बाल ख़तरे में पड़ गया, सरकार की हिम्मत नहीं कि गोली तो छोड़ो सड़क घेरे लोगों को एक लाठी तक चला सके।
यदि आप ऐसा सोचते हैं तो ग़लत जगह खड़े हैं। जिस दिन प्रधानमंत्री चाह जायें और वह लोकप्रियता और सरकारी मशीनरी पर नियंत्रण के जिस शिखर पर बैठे हैं यदि एक हल्का सा इशारा भी कर दें तो इन अराजक तत्वों को दफ़न होने के लिए जगह भी नहीं मिलेगी। जिसको यह छोटी सी बात नहीं समझ आ रही उन्हें केवल इतना देखना चाहिए कि जिस दिन प्रधानमंत्री ने इच्छा व्यक्त कर दी कि देश से नक्सली समाप्त होने चाहिए, मात्र एक माह के भीतर एक से एक ख़ूँख़ार नक्सली संगठन पोस्टर चिपकाने लगे कि हम बात करने को तैयार हैं, हमें मारा न जाये। शहर में बैठे उनके NGO बाज समर्थक चिल्लाते रहे कि सरकार को इनको मारना नहीं चाहिए लेकिन सरकार ने इनकी लाशें बिछा दीं। जो भी रास्ते में आता सबको नेस्तनाबूत कर दिया।
जंगल में रह रहे इन नृशंस नक्सलियों को सफाया करने में जिसे एक महीना काफ़ी है, वह जिस दिन चाह जाएगा इन सड़क पर घूम रहे, चाँदी के चम्मच लेकर पैदा हुए अराजक तत्वों से निपटने में कितना समय लगायेगा? उसे इनको मिटाने के लिए सरकारी मशीनरी की भी जरूरत नहीं है केवल कैडर को इशारा भर कर दें, इन अराजकतावादी तत्वों को एक सप्ताह में जड़ मूल से समाप्त किया जा सकता है, जिनको न याद हो वह गोधरा याद कर लें जिसमें विपक्ष और एनजीओ गैंग आरोप लगाते हैं कि मोदी ने सरकारी मशीनरी को कुछ दिन के लिए हटा भर लिया था, सरकारी मशीनरी को लगाया नहीं था।
अतः जिन लोगों को खुली आँखों से यह सपना आ रहा है कि वह अपने अराजकता से भारत के संविधान का गला घोंट का भीड़ का सहारा लेकर इस देश की सत्ता बदल सकते हैं, तो ये सपना देखना छोड़ दें। इस देश की बहुसंख्य जनता हिंदू है और हिंदू मात्र होने से लोकतंत्र और असहमति को जगह देना इसके डीएनए में है, इसलिए सब सहा जाता है। और इस सहनशीलता के परिणाम दूर दृष्टि से अच्छे मिल रहे हैं। खालिस्तानी किसान आंदोलन को चलने दिया गया, क्या परिणाम हुआ? वो लोग जो इस आंदोलन के बहाने अपनी स्ट्रीट पॉवर दिखाना चाहते थे वह पॉवर से नेस्तनाबूत हो गए। पंजाब में जहाँ भाजपा का नामो निशान नहीं था, अकाली दल से देश गुना अधिक वोट पाने वाली पार्टी बनी। CAA के नाम पर दंगे किए, सड़क घेरा क्या हुआ? लोग और इन जेहादीयों के ख़िलाफ़ इकट्ठे हुए।
आज़ राहुल गांधी को लगता है कि वह अराजकता फैला कर देश में सत्ता बदल सकता है क्यूंकि अमेरिका भारत के ख़िलाफ़ खड़ा है, अभी डेढ़ दो साल पहले इसे भ्रम था कि चीन इसके साथ खड़ा है इसलिए इसे मौक़ा मिलेगा। इसे यह लगता है कि यह चुनाव नहीं जीत सकता तो क्या हुआ, सड़क पर बवाल खड़ा कर सकता है। इसको यह नहीं पता कि मोदी तुमने बवाल काटने दे रहा है इसका मतलब है कि इससे उसके विचारधारा को फ़ायदा मिल रहा है और जिस दिन फ़ायदा होने के बजाय राष्ट्रवाद को घटा लगेगा, तुम कैसे किनारे लगाए जाओगे पता भी नहीं चलेगा। सरकार की ताक़त तो इतनी होती है कि जिस इंदिरा गांधी को ये लौह महिला बताता है उन्हें एक सौम्य प्रधानमंत्री ने मुर्गा चोरी तक के केस में पेशी करवा दिया था।
उसके समर्थकों को यह बिलकुल एहसास नहीं होना चाहिए कि वह स्ट्रीट पॉवर के बलबूते भारत के संविधान, बहुमत से चुनें सरकार, लोकप्रिय प्रधानमंत्री और राष्ट्रवाद की विचारधारा को समाप्त कर सकते हैं। तुम सब मोदी के टूल हो, तुम्हें पता भी नहीं और तुम इस्तेमाल हो रहे हो।
यह देश न बांग्लादेश है, न पाकिस्तान, यह भारत है और भारत अपने व्यवस्थाओं से ही चलेगा। यदि किसी ने इसके संविधान और लोकतांत्रिक व्यवस्था को चुनौती वास्तव में दे दी तो उसका हश्र वहीं होगा जो अभी एक महीने पहले नक्सलियों का जंगल में हुआ है। अतः भारत के ख़िलाफ़ बगावत और तख्तापलट का किसी को सपना आ रहा है तो उसे देखना बंद कर दो। तख्तापलट करना है तो चुनाव में जीत हासिल करो। चुनाव आयोग में भरोसा नहीं है तो सुप्रीम कोर्ट में जाओ, लेकिन बहुमत का फैसला सड़क पर करके की गलती कभी नहीं करना।

18/08/2025

#अंधकार_युग_की_झलक_3

2025 में हिंदुओं के मध्य जातिवाद के कारण फूट पड़ गई है और 2029 का चुनाव जीतने के बाद राहुल गांधी प्रधानमंत्री की शपथ लेते हैं।

तीन महीने के अंदर लोकतंत्र के दो सबसे बड़े स्तम्भों पर कब्जा करने के बाद अगले नौ महीने में राहुल गांधी ने शिक्षा, संसद, संवैधानिक संस्थाएं और अर्थव्यवस्था पर नियंत्रण भी बना लिया है।
अब आगे :---
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देश में भयानक बेचैनी छा चुकी है और अर्थव्यवस्था हिचकोले खाने लगी है और भाजपा जनता को आंदोलित करने का प्रयास कर रही है लेकिन अपनी माँ के अधूरे एजेंडे को पूरा करने के लिए राहुल अडिग हैं। वह भारत की जनता से अपना प्रतिशोध लेने पर उतारू हैं।

राहुल गांधी R&AW के चीफ को बुलाकर पकिस्तान डेस्क खतम करने का आदेश जारी करते हैं।

इसके बाद पता नहीं कैसे लेकिन विदेशों में भारतीय एजेंट व असेट्स एक एक करके एलीमिनेट किये जाने लगते हैं।

वह इसरो, डीआरडीओ का बजट पहले ही आधे से कम कर चुके हैं और अब वह हथियार उत्पादन कारखानों को घाटे में दिखाकर बंद करने का आदेश जारी कर देते है और अन्य रक्षा उत्पादन संस्थानों के बजट में भी कटौती करने का आदेश जारी कर देते हैं।

इसके बाद प्रधानमंत्री राहुल गांधी सैन्य बजट में भारी कमी करके पैसे को 'विकास कार्यों' में खर्च करने की योजना पेश करते हैं और पूर्व में हुए रक्षा सौदों की समीक्षा करने के लिए एक समिति बना देते हैं।

इसके बाद वह सेना के जनरलों की मीटिंग बुलाते हैं और सेना की अग्निवीर योजना में अनिवार्य रुप से पचास प्रतिशत मुस्लिम नवयुवकों की भरती का आदेश जारी करते हैं।

वह भारत के परमाणु बटन का पूरा नियंत्रण पाँच जगह बांटने के स्थान पर पूरी तरह अपने हाथ में ले लेते हैं।

इसके बाद वह CDS को बुलाकर थलसेना को पाकिस्तान सीमा पर फायरिंग के मामले में संयम बरतने का आदेश देते हैं और कश्मीर में बल प्रयोग को बंद करने का आदेश जारी करते हैं।

इसके साथ ही वह वह बांग्लादेशी सीमा पर बी एस एफ की तैनाती में भारी कमी करते हैं और बांग्लादेशी व रोहिंग्याओं को मानवता के नाम पर शरण देते हैं जबकि पाकिस्तान व बांग्लादेश से आये हिंदू शरणार्थियों को राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा बताकर उन्हें वापस खदेड देते हैं।

इसके बाद राहुल गांधी सभी राज्यों के मुख्यमंत्रियों की बैठक बुलाकर पुलिस विभाग में संघ पृष्ठभूमि के अधिकारियों की लिस्ट की फाइलें देते है और पुलिस तंत्र को 'धर्मनिरपेक्ष' बनाने के लिए अधिकतम मुस्लिम युवाओं को भर्ती करने का आग्रह करते हैं।

भाजपा के मुख्यमंत्री जब इस योजना का विरोध करते हैं तो वह वहीं बैठक से ही भाजपा सरकारों को बर्खास्त करने की चेतावनी देते हैं।

उसके बाद राहुल गांधी वक्फ बोर्ड की असीमित शक्तियों को पुनः बहाल कर देते हैं।

अब उनके सामने है उनका मुख्य शत्रु जो हर हालत में भारत की महानता को स्थापित करने को दृढ़प्रतिज्ञ है और वह है ---'राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ'।

संघ से निबटने के लिए राहुल गांधी मुस्लिम आतंकी संगठन 'पॉपुलर फ्रंट' पर लगी रोक ही हटा देते हैं जिसके बाद पॉपुलर फ्रंट उत्तर भारत में भी अपनी हजारों शाखाये स्थापित करता है और मदरसों के माध्यम से उसका विशाल नैटवर्क कुछ ही महीनों में बन जाता है।
उसके सदस्य क्रमशः रहस्यमय रूप से गायब होकर पाकिस्तान में प्रकट होते हैं व प्रशिक्षण लेकर वापस लौट आते हैं और यह सिलसिला लगातार चलता है।
चीन व बांगलादेश के रास्ते उनके पास हथियारों का जखीरा भी जमा होने लगता है और अगले छः महीने तक वह अग्निवीर से आये मुस्लिम सैनिकों व पाकिस्तान से प्रशिक्षित बीस लाख प्रशिक्षित व सशस्त्र मुस्लिम युवकों का काडर खड़ा कर लेता है।

जाकिर नाइक, मदनी और ओवेसी के जहरीले भाषण मुस्लिमों को पॉपुलर फ्रंट में सम्मिलित होने के लिए प्रेरित करते हैं।

फ्रंट की ताकत बढ़ती जाती है और जो अधिकारी इसकी रिपोर्ट ऊपर देते हैं उनका या तो तबादला हो जाता है या वे मरे पाए जाते हैं।।

उधर कश्मीर में 370 की वापसी को लेकर हिंसक आंदोलन शुरू हो जाता है और राहुल गांधी पूर्ववर्ती सरकार की गलती मानते हुए अनुच्छेद 370 को रिस्टोर कर देते हैं।

कश्मीर में भाजपा के शासनकाल में लौटे पंडितों को पुनः खदेड़ दिया जाता है और पुनः निर्मित मंदिरों को तोड़ दिया जाता है।

मुस्लिम मुहल्लों में मुस्लिम पुलिस स्टेशन खोल दिए जाते हैं जो न केवल मुस्लिम अपराधियों को संरक्षण देते हैं बल्कि मुस्लिमों की तहरीर पर आसपास के हिंदुओं को गिरफ्तार करो उत्पीड़ित करते हैं।

मुस्लिम संस्थान की मांगों पर एक अभूतपूर्व निर्णय लेकर राहुल गांधी मुस्लिम मामलों में शरिया अदालतों को मान्यता दे देते हैं।

पूरे भारत में अब दिन दहाड़े हिंदू लड़कियों का अपहरण व जबरन निकाह, भूमि पर वक्फ बोर्ड का कब्जा एवं हिंदुओं की पिटाई आम बात हो गई है।

हिंदू जब व्यक्तिगत या सामूहिक स्तर पर प्रतिरोध करते हैं तो उनपर साम्प्रदायिक हिंसा निवारण अधिनियम के तहत मुकदमा दायर कर सामूहिक रूप से गिरफ्तार कर जेलों में ठूँस दिया जाता है।

अब भारत में अचानक महानगरों में धमाकों का सिलसिला शुरू हो जाता है। इस्लामिक संगठनों के लिप्त होने के भाजपा के आरोपों पर वह भाजपा को सांम्प्रदायिकता का पुराना आरोप लगाते हैं।

ठीक ढाई साल बाद सारी तैयारी करके वक्फ बोर्ड अयोध्या में राम मंदिर की भूमि पर दावा करता है और तमाम मुस्लिम संगठन प्रधानमन्त्री राहुल गांधी को ज्ञापन देकर राम मंदिर को उस भूमि से हटाने की मांग करते हैं।

आश्चर्जनक रूप से राहुल गांधी मुस्लिमों की मांग स्वीकार कर सुप्रीम कोर्ट के वर्तमान न्यायधीशों की एक कमेटी बना देते हैं जो 2019 के सुप्रीम कोर्ट के फैसले की समीक्षा करती है।

अब पूरे देश की हिंदू जनता उबल पड़ती है और संघ व भाजपा खुले रूप सड़कों पर उतर आते हैं।

राहुल गांधी बिना किसी हिचकिचाहट के संघ पर प्रतिबंध लगा देते हैं और मोहन भागवत व संघ के शीर्ष पदाधिकारियों सहित भाजपा के वरिष्ठ नेताओं जैसे नरेन्द्र मोदी, अमितशाह, योगी आदित्यनाथ, हेमंत विश्वा शर्मा व अन्य लोकप्रिय नेताओं को गिरफ्तार कर लेते हैं और उन्हें सामान्य जेल में डाल देते हैं।

संघ व भाजपा के आंदोलनकारियों पर पुलिस सख़्ती की जाती है और मुस्लिम बहुल पुलिस को उन्हें दबाने भेजा जाता हैं।

अब पूरे देश में छिटपुट दंगे शुरू हो जाते हैं और अर्धसैनिक बल उन्हें संभालने में असमर्थ हो जाते हैं और तब सेना को बुलाया जाता है।

जब सेना फ्लैग मार्च करती है तो मुस्लिम बस्तियों से उनपर पैट्रोल बम फैंके जाते हैं और स्वचलित हथियारों से फायरिंग शुरू हो जाती है।

ठीक इसी समय पश्चिम से पकिस्तान भारत पर आक्रमण कर देता है।

सेना के हिंदू अग्निवीरों को प्रतिरोध की खातिर छोड़कर सेना पकिस्तान के विरुद्ध युद्ध के लिए निकल जाती है।

अब भारत पूरी तरह अराजकता व गृह युद्ध की चपेट में है।

सेना के जनरल कोई उपाय न देखकर सत्ता हाथ में लेने का फैसला करते हैं लेकिन राहुल गांधी को सेना में भेजी गई काली भेड़ों से पहले ही इस योजना का पता चल जाता है और वह एक प्लेन में सैकड़ों टन सोना लादकर भारत की सीमाओं से निकलकर लक्सम्बर्ग में राजनैतिक शरण और फिर नागरिकता ले लेते हैं।

और इधर भारत भयानक गृहयुद्ध की आग में जल रहा था।

सेना के जनरलों के आदेश पर जब भाजपा व संघ के नेताओं को रिहा करने एक युवा सैन्य अधिकारी जेल पहुँचता है तो उसे एक विचलित करने वाला दृश्य दिखाई देता है।

अपने बिस्तर पर भारत के पूर्व प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी फूट फूटकर रो रहे थे और जोर जोर से चिल्ला रहे थे --

"जो कुछ मैंने इतनी मेहनत से बनाया था वह सब बर्बाद कर दिया इस धूर्त राहुल ने।"

उन्हें उठाकर बाहर ले जाता हुआ युवा अधिकारी उनके कान में फुसफुसाता है,
"सर, आपकी अटूट देशभक्ति में किसी को शक नहीं है लेकिन इसके जिम्मेदार और कोई नहीं आप स्वयं हैं क्योंकि आपने मूल इस्लामिक समस्या को हल नहीं किया बल्कि सदा उसे टालते रहे।"

"आपके पास समय, शक्ति व संसाधन तीनों थे लेकिन आप साम, दाम, भेद और दंड में से दंड को भूल ही गये थे।"

वृद्ध मोदीजी का सिर पश्चाताप में झुक गया।

(क्रमशः)

Note अगले अंक में भारत में गृहयुद्ध की विभीषिका व देशभक्तों के रक्तिम 'प्रतिरोध' का वर्णन।

09/08/2025

Sharad Saxena 💪, born on 17 August 1950 in Satna, Madhya Pradesh 🇮🇳, is a veteran Bollywood actor known for his powerful screen presence and action roles 🎬. With films like Ghulam 🥊, Bodyguard, and Mr. India 🔫, he played iconic villains and supporting roles. A fitness enthusiast 🏋️‍♂️,

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