12/01/2025
महाकुंभ मेला इस विश्व के सात महाद्वीपों में एशिया महाद्वीप के भारत देश में उत्तर प्रदेश के पवित्र नगर प्रयागराज में "त्रिवेणी के संगम" पर आयोजित हो रहा है। यह वैदिक धर्म के मतावलंबियों का सबसे बड़ा त्यौहार है जिसे कुंभ अर्थात "पवित्र घट का त्योहार "कहा जाता है। यह दुनिया के सबसे बड़े सार्वजनिक समागम और आस्था का सामूहिक आयोजन होता है । इस समागम में मुख्य रूप से तपस्वी साधु, साध्वी , कल्पवासी तथा विश्व के कोने-कोने से आए तीर्थ यात्री शामिल होते हैं साथ ही अनेक देशों के धार्मिक मतावलंबी एवं पर्यटक भी बड़ी संख्या में शामिल होते हैं ।
कुंभ मेले में लगभग सभी धर्म के लोग आते हैं उनमें से वैदिक साधु और नागा शामिल होते है जो एकांतवास छोड़कर केवल कुंभ मेले के दौरान वर्तमान में भ्रमण करते हैं और अपने आध्यात्मिक अनुशासन ,कठोर साधना अनुसरण मार्ग पर पूरा कुंभ काल व्यतीत करते हैं तथा अन्य आध्यात्मिक ज्ञानी तथा आम लोग भी शामिल होते हैं।
कुंभ मेला सूर्य, चंद्रमा तथा बृहस्पति की ज्योतिषी गणना के आधार पर आधारित होता है। यह उत्सव ठीक उसी समय होता है जब वैदिक धर्म में सबसे पवित्र समय माना जाता है। कुंभ मेले का आयोजन जो की पूर्ण रूप से खगोलविज्ञान,ज्योतिष ,अध्यात्मिक, अनुष्ठानिक कर्मकांड परंपराओं और सामाजिक- सांस्कृतिक रीति-रिवाज एवं प्रथाओं के सम्मिलित विज्ञान को समाहित करता है जिससे यह ज्ञान बेहद समृद्धशाली हो जाता है।
कुंभ कल के दौरान पूरे महत्वपूर्ण तिथियां और मध्य में अनेक समारोह आयोजित होते रहते हैं। प्रारंभ में ही हाथी ,घोड़े तथा रथों पर अखाड़ों का पारंपरिक जुलूस जिसे "पेशवाई " की संज्ञा दी जाती है भव्य आयोजन किया जाता है । शाही स्नान के दौरान अनेक साधु, नागा संन्यासी इसमें प्रतिभाग करते हैं तथा अनेक सांस्कृतिक गतिविधियों में संलग्न रहते हैं। यह आयोजन कुंभ मेले में आए तीर्थ यात्रियों के लिए आकर्षण का केंद्र होते हैं।
वैदिक धर्म में कुंभ मेला एक धार्मिक तीर्थ यात्रा है जो 12 वर्षों के दौरान चार बार आयोजित किया जाता है। कुंभ मेला भारत में भौगोलिक रूप से चार स्थानों पर आयोजित किया जाता है जो की चार पवित्र नदियों के स्थान पर स्थित चार तीर्थ स्थलों के क्षेत्र में आयोजित किया जाता है ।जिनमें..
(1 )उत्तराखंड में राज्य के गंगा नदी पर तट पर स्थित हरिद्वार
(2)मध्य प्रदेश में शिप्रा नदी के तट पर स्थित उज्जैन
(3) महाराष्ट्र में गोदावरी के तट पर स्थित नासिक तथा
(4 )उत्तर प्रदेश में प्रयागराज में सबसे पवित्र स्थल गंगा यमुना और पौराणिक अदृश्य सरस्वती के संगम अर्थात् "त्रिवेणी के संगम" पर आयोजित किया जाता है।
कुंभ मेले का आयोजन उपरोक्त चारों स्थल पर आयोजित किया जाता है।
2025 में महाकुंभ मेला प्रयागराज में 13 जनवरी 2025 से 26 फरवरी 2025 तक आयोजित किया जाएगा जिसमें महत्वपूर्ण तिथियां पर आयोजित होने वाले कार्यक्रम निम्नवत रहेंगे ....
(1) पौष पूर्णिमा दिन सोमवार तिथि 13 जनवरी 2025
(2) मकर संक्रांति दिन मंगलवार 14 जनवरी 2025
(3) मौनी अमावस्या सोमवती दिन बुधवार दिनांक 29 जनवरी 2025
(4) बसंत पंचमी दिन सोमवार दिनांक 3 फरवरी 2025
(5) माघी पूर्णिमा दिन बुधवार दिनांक 12 फरवरी 2025
(6) महाशिवरात्रि दिन बुधवार दिनांक 26 फरवरी 2025