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गायत्री मंत्र क्यों और कब ज़रूरी है☀सुबह उठते वक़्त 8 बार ❕✋✌👆❕अष्ट कर्मों को जीतने के लिए !!🍚🍜 भोजन के समय 1 बार❕👆❕ अमृ...
29/10/2015

गायत्री मंत्र क्यों और कब ज़रूरी है

☀सुबह उठते वक़्त 8 बार ❕✋✌👆❕अष्ट कर्मों को जीतने के लिए !!

🍚🍜 भोजन के समय 1 बार❕👆❕ अमृत समान भोजन प्राप्त होने के लिए !!

🚶 बाहर जाते समय 3 बार ❕✌👆❕समृद्धि सफलता और सिद्धि के लिए !!

👏 मन्दिर में 12 बार ❕👐✌❕
प्रभु के गुणों को याद करने के लिए !!

😢छींक आए तब गायत्री मंत्र उच्चारण ☝1 बार अमंगल दूर करने के लिए !!

सोते समय 🌙 7 बार ❕✋✌ ❕सात प्रकार के भय दूर करने के लिए !!

कृपया सभी बन्धुओं को प्रेषित करें 👏👏 !!!

ॐ , ओउम् तीन अक्षरों से बना है।
अ उ म् ।
"अ" का अर्थ है उत्पन्न होना,

"उ" का तात्पर्य है उठना, उड़ना अर्थात् विकास,

"म" का मतलब है मौन हो जाना अर्थात् "ब्रह्मलीन" हो जाना।

ॐ सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड की उत्पत्ति और पूरी सृष्टि का द्योतक है।

ॐ का उच्चारण शारीरिक लाभ प्रदान करता है।

जानीए

ॐ कैसे है स्वास्थ्यवर्द्धक
और
अपनाएं आरोग्य के लिए ॐ के उच्चारण का मार्ग...

1. ॐ और थायराॅयडः-
ॐ का उच्‍चारण करने से गले में कंपन पैदा होती है जो थायरायड ग्रंथि पर सकारात्मक प्रभाव डालता है।

2. ॐ और घबराहटः-
अगर आपको घबराहट या अधीरता होती है तो ॐ के उच्चारण से उत्तम कुछ भी नहीं।

3. ॐ और तनावः-
यह शरीर के विषैले तत्त्वों को दूर करता है, अर्थात तनाव के कारण पैदा होने वाले द्रव्यों पर नियंत्रण करता है।

4. ॐ और खून का प्रवाहः-
यह हृदय और ख़ून के प्रवाह को संतुलित रखता है।

5. ॐ और पाचनः-
ॐ के उच्चारण से पाचन शक्ति तेज़ होती है।

6. ॐ लाए स्फूर्तिः-
इससे शरीर में फिर से युवावस्था वाली स्फूर्ति का संचार होता है।

7. ॐ और थकान:-
थकान से बचाने के लिए इससे उत्तम उपाय कुछ और नहीं।

8. ॐ और नींदः-
नींद न आने की समस्या इससे कुछ ही समय में दूर हो जाती है। रात को सोते समय नींद आने तक मन में इसको करने से निश्चिंत नींद आएगी।

9. ॐ और फेफड़े:-
कुछ विशेष प्राणायाम के साथ इसे करने से फेफड़ों में मज़बूती आती है।

10. ॐ और रीढ़ की हड्डी:-
ॐ के पहले शब्‍द का उच्‍चारण करने से कंपन पैदा होती है। इन कंपन से रीढ़ की हड्डी प्रभावित होती है और इसकी क्षमता बढ़ जाती है।

11. ॐ दूर करे तनावः-
ॐ का उच्चारण करने से पूरा शरीर तनाव-रहित हो जाता है।

आशा है आप अब कुछ समय जरुर ॐ का उच्चारण करेंगे। साथ ही साथ इसे उन लोगों तक भी जरूर पहुंचायेगे जिनकी आपको फिक्र है 🙏

"पहला सुख निरोगी काया"

पीपल के पत्तों जैसा मत बनो जो वक्त आने पर सूख कर गिर जाते है बनना है तो मेहँदी के पत्तों जैसा बनो जो पिस कर भी दूसरों की...
28/10/2015

पीपल के पत्तों जैसा मत बनो जो वक्त आने पर सूख कर गिर जाते है

बनना है तो

मेहँदी के पत्तों जैसा बनो जो पिस कर भी दूसरों की जिंदगी में रँग भर देते हैं.

हमारे विचार भी बहते हुए पानी की तरह है,
यदि हम उसमे गन्दगी मिलायंगे
तो वह नाला बन जाएगा

और यदि सुगंध मिला देंगे
तो वही गंगाजल बन जाएगा
🌹 Jay Bhagwan🌹

हर सुबह अपनी ज़िन्दगी को एक नया ख्वाब तो दो;चाहे पूरा ना हो पर आवाज़ तो दो;एक दिन पूरे हो जायेंगे सारे ख्वाब तुम्हारे;सिर्...
14/09/2015

हर सुबह अपनी ज़िन्दगी को एक नया ख्वाब तो दो;
चाहे पूरा ना हो पर आवाज़ तो दो;
एक दिन पूरे हो जायेंगे सारे ख्वाब तुम्हारे;
सिर्फ कोशिश करके एक शुरुआत तो दो।

सुप्रभात! आपका दिन आनंदमयी हो।😊💐

Happy rakshabandan to all...
29/08/2015

Happy rakshabandan to all...

11/08/2015

. 🍃 ॐ नम: सिवाय🍃
🌷**•🍃•*´`*•¸🍃¸•*´`*•.🌷
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हनुमान जी के विवाह का रहस्य ......... ..........संकट मोचन हनुमान जी के ब्रह्मचारी रूप से तो सब परिचित हैं..उन्हें बाल ब्...
06/08/2015

हनुमान जी के विवाह का रहस्य ......... ..........
संकट मोचन हनुमान जी के ब्रह्मचारी रूप से तो सब परिचित हैं..
उन्हें बाल ब्रम्हचारी भी कहा जाता है...
लेकिन क्या अपने कभी सुना है की हनुमान जी का विवाह भी हुआ
था ??
और उनका उनकी पत्नी के साथ एक मंदिर भी है ??
जिसके दर्शन के लिए दूर दूर से लोग आते हैं..
कहा जाता है कि हनुमान जी के उनकी पत्नी के साथ दर्शन करने के
बाद घर मे चल रहे पति पत्नी के बीच के सारे तनाव खत्म हो जाते हैं.
आन्ध्र प्रदेश के खम्मम जिले में बना हनुमान जी का यह मंदिर काफी मायनों में ख़ास है..
ख़ास इसलिए की यहाँ हनुमान जी अपने ब्रम्हचारी रूप में नहीं बल्कि गृहस्थ रूप में अपनी पत्नी सुवर्चला के साथ विराजमान है.
हनुमान जी के सभी भक्त यही मानते आये हैं की वे बाल ब्रह्मचारी थे.
और बाल्मीकि, कम्भ, सहित किसी भी रामायण और रामचरित मानस में
बालाजी के इसी रूप का वर्णन मिलता है..
लेकिन पराशर संहिता में हनुमान जी केविवाह का उल्लेख है.
इसका सबूत है आंध्र प्रदेश के खम्मम ज़िले में बना एक खास मंदिर जो प्रमाण है हनुमान जी की शादी का।
ये मंदिर याद दिलाता है रामदूत के उस चरित्र का जब उन्हें विवाह के बंधन में बंधना पड़ा था।
लेकिन इसका ये अर्थ नहीं कि भगवान हनुमान जी बाल ब्रह्मचारी नहीं थे।
पवनपुत्र का विवाह भी हुआ था और वो बाल ब्रह्मचारी भी थे।
कुछ विशेष परिस्थियों के कारण ही बजरंगबली को सुवर्चला के साथ विवाह बंधन मे बंधना पड़ा।
हनुमान जी ने भगवान सूर्य को अपना गुरु बनाया था। हनुमान, सूर्य से अपनी शिक्षा ग्रहण कर रहे थे...
सूर्य कहीं रुक नहीं सकते थे इसलिए हनुमान जी को सारा दिन भगवान
सूर्य के रथ के साथ साथ उड़ना पड़ता और भगवान सूर्य उन्हें तरह- तरह की विद्याओं का ज्ञान देते।
लेकिन हनुमान जी को ज्ञान देते समय सूर्य के सामने एक दिन धर्मसंकट खड़ा हो गया।
कुल ९ तरह की विद्या में से हनुमान जी को उनके गुरु ने पांच तरह
की विद्या तो सिखा दी लेकिन बची चार तरह की विद्या और ज्ञान ऐसे थे जो केवल किसी विवाहित को ही सिखाए जा सकते थे.
हनुमान जी पूरी शिक्षा लेने का प्रण कर चुके थे और इससे कम पर वो मानने को राजी नहीं थे।
इधर भगवान सूर्य के सामने संकट था कि वो धर्म के अनुशासन के कारण किसी अविवाहित को कुछ विशेष विद्याएं नहीं सिखला सकते थे।
ऐसी स्थिति में सूर्य देव ने हनुमान जी को विवाह की सलाह दी..
और अपने प्रण को पूरा करने के लिए हनुमान जी भी विवाह सूत्र में बंधकर शिक्षा ग्रहण करने को तैयार हो गए।
लेकिन हनुमान जी के लिए दुल्हन कौन हो और कहा से वह मिलेगी इसे लेकर सभी चिंतित थे.. ऐसे में सूर्यदेव ने अपने शिष्य हनुमान जी को राह दिखलाई।
सूर्य देव ने अपनी परम तपस्वी और
तेजस्वी पुत्री सुवर्चला को हनुमान जी के साथ शादी के लिए तैयार कर लिया।
इसके बाद हनुमान जी ने अपनी शिक्षा पूर्ण की और सुवर्चला सदा के लिए अपनी तपस्या में रत हो गई।
इस तरह हनुमान जी भले ही शादी के बंधन में बांध गए हो लेकिन शाररिक रूप से वे आज भी एक ब्रह्मचारी ही हैं.
पराशर संहिता में तो लिखा गया है की खुद सूर्यदेव ने इस शादी पर यह कहा की - यह शादी ब्रह्मांड के कल्याण के लिए ही हुई है और इससे हनुमान जी का ब्रह्मचर्य भी प्रभावित नहीं हुआ ....!!
Jai shree ram

Kuchh vaastu tips🔴🔴🔴🔴💥१. घर में सुबह सुबह कुछ देर के लिए भजन अवशय लगाएं ।💥२. घर में कभी भी झाड़ू को खड़ा करके नहीं रखें,...
04/06/2015

Kuchh vaastu tips🔴🔴🔴🔴
💥१. घर में सुबह सुबह कुछ देर के लिए भजन अवशय लगाएं ।
💥२. घर में कभी भी झाड़ू को खड़ा करके नहीं रखें, उसे पैर नहीं लगाएं, न ही उसके ऊपर से गुजरे अन्यथा घर में बरकत की कमी हो जाती है। झाड़ू हमेशा छुपा कर रखें |
💥३. बिस्तर पर बैठ कर कभी खाना न खाएं, ऐसा करने से बुरे सपने आते हैं।
💥४. घर में जूते-चप्पल इधर-उधर बिखेर कर या उल्टे सीधे करके नहीं रखने चाहिए इससे घर में अशांति उत्पन्न होती है।
💥५. पूजा सुबह 6 से 8 बजे के बीच भूमि पर आसन बिछा कर पूर्व या उत्तर की ओर मुंह करके बैठ कर करनी चाहिए । पूजा का आसन जुट अथवा कुश का हो तो उत्तम होता है |
💥६. पहली रोटी गाय के लिए निकालें। इससे देवता भी खुश होते हैं और पितरों को भी शांति मिलती है |
💥७.पूजा घर में सदैव जल का एक कलश भरकर रखें जो जितना संभव हो ईशान कोण के हिस्से में हो |
💥८. आरती, दीप, पूजा अग्नि जैसे पवित्रता के प्रतीक साधनों को मुंह से फूंक मारकर नहीं बुझाएं।
💥९. मंदिर में धूप, अगरबत्ती व हवन कुंड की सामग्री दक्षिण पूर्व में रखें अर्थात आग्नेय कोण में |
💥१०. घर के मुख्य द्वार पर दायीं तरफ स्वास्तिक बनाएं |
💥११. घर में कभी भी जाले न लगने दें, वरना भाग्य और कर्म पर जाले लगने लगते हैं और बाधा आती है |
💥१२. सप्ताह में एक बार जरुर समुद्री नमक अथवा सेंधा नमक से घर में पोछा लगाएं | इससे नकारात्मक ऊर्जा हटती है |
💥१३. कोशिश करें की सुबह के प्रकाश की किरणें आपके पूजा घर में जरुर पहुचें सबसे पहले |
💥१४. पूजा घर में अगर कोई प्रतिष्ठित मूर्ती है तो उसकी पूजा हर रोज निश्चित रूप से हो, ऐसी व्यवस्था करे |

शाकाहार को जन जन तक पहुंचाती "सौरभ जैन सुमन" की वो कविता जिसे जब चैनल पर दिखाया गया तो अनेक मांसाहारियों ने आजीवन शाकाहा...
03/06/2015

शाकाहार को जन जन तक पहुंचाती "सौरभ जैन सुमन" की वो कविता जिसे जब चैनल पर दिखाया गया तो अनेक मांसाहारियों ने आजीवन शाकाहार का नियम लिया।

गर्व था भारत-भूमि को
कि महावीर की माता हूँ।।

राम-कृष्ण और नानक जैसे
वीरो की यशगाथा हूँ॥

कंद-मूल खाने वालों से
मांसाहारी डरते थे।।

पोरस जैसे शूर-वीर को
नमन 'सिकंदर' करते थे॥

चौदह वर्षों तक वन में
जिसका धाम था।।

मन-मन्दिर में बसने
वाला शाकाहारी राम था।।

चाहते तो खा सकते थे
वो मांस पशु के ढेरो में।।

लेकिन उनको प्यार मिला
' शबरी' के झूठे बेरो में॥

चक्र सुदर्शन धारी थे
गोवर्धन पर भारी थे॥

मुरली से वश करने वाले
'गिरधर' शाकाहारी थे॥

पर-सेवा, पर-प्रेम का परचम
चोटी पर फहराया था।।

निर्धन की कुटिया में जाकर जिसने मान बढाया था॥

सपने जिसने देखे थे
मानवता के विस्तार के।।

नानक जैसे महा-संत थे
वाचक शाकाहार के॥

उठो जरा तुम पढ़ कर
देखो गौरवमयी इतिहास को।।

आदम से गाँधी तक फैले
इस नीले आकाश को॥

दया की आँखे खोल देख लो
पशु के करुण क्रंदन को।।

इंसानों का जिस्म बना है
शाकाहारी भोजन को॥

अंग लाश के खा जाए
क्या फ़िर भी वो इंसान है?

पेट तुम्हारा मुर्दाघर है
या कोई कब्रिस्तान है?

आँखे कितना रोती हैं
जब उंगली अपनी जलती है।।

सोचो उस तड़पन की हद
जब जिस्म पे आरी चलती है॥

बेबसता तुम पशु की देखो
बचने के आसार नही।।

जीते जी तन काटा जाए,
उस पीडा का पार नही॥

खाने से पहले बिरयानी,
चीख जीव की सुन लेते।।

करुणा के वश होकर तुम भी
गिरी गिरनार को चुन लेते॥

शाकाहारी बनो...!
।।.शाकाहार-अभियान.।।

भगवती बगला सुधा-समुद्र के मध्य में स्थित मणिमयमण्डप में रत्नवेदी पर रत्नमय सिंहासन पर विराजतीहैं। पीतवर्णा होने के कारण ...
03/06/2015

भगवती बगला सुधा-समुद्र के मध्य में स्थित मणिमय
मण्डप में रत्नवेदी पर रत्नमय सिंहासन पर विराजती
हैं। पीतवर्णा होने के कारण ये पीत रंग के ही वस्त्र,
आभूषण व माला धारण किये हुए हैं।इनके एक हाथ में
शत्रु की जिह्वा और दूसरे हाथ में मुद्गर है। व्यष्टि
रूप में शत्रुओं का नाश करने वाली और समष्टि रूप में
परम ईश्वर की सहांर-इच्छा की अधिस्ठात्री
शक्ति बगला है।
श्री प्रजापति ने बगला उपासना वैदिक रीती से
की और वे सृस्टि की संरचना करने में सफल हुए। श्री
प्रजापति ने इस विद्या का उपदेश सनकादिक
मुनियों को दिया। सनत्कुमार ने इसका उपदेश श्री
नारद को और श्री नारद ने सांख्यायन परमहंस को
दिया, जिन्होंने छत्तीस पटलों में “बगला तंत्र” ग्रन्थ
की रचना की। “स्वतंत्र तंत्र” के अनुसार भगवान्
विष्णु इस विद्या के उपासक हुए। फिर श्री परशुराम
जी और आचार्य द्रोण इस विद्या के उपासक हुए।
आचार्य द्रोण ने यह विद्या परशुराम जी से ग्रहण
की।
श्री बगला महाविद्या ऊर्ध्वाम्नाय के अनुसार ही
उपास्य हैं, जिसमें स्त्री (शक्ति) भोग्या नहीं
बल्कि पूज्या है। बगला महाविद्या “श्री कुल” से
सम्बंधित हैं और अवगत हो कि श्रीकुल की सभी
महाविद्याओं की उपासना अत्यंत सावधानी पूर्वक
गुरु के मार्गदर्शन में शुचिता बनाते हुए, इन्द्रिय निग्रह
पूर्वक करनी चाहिए। फिर बगला शक्ति तो अत्यंत
तेजपूर्ण शक्ति हैं, जिनका उद्भव ही स्तम्भन हेतु हुआ
था। इस विद्या के प्रभाव से ही महर्षि च्यवन ने इंद्र
के वज्र को स्तंभित कर दिया था। श्रीमद्
गोविंदपाद की समाधि में विघ्न डालने से रोकने के
लिए आचार्य श्री शंकर ने रेवा नदी का स्तम्भन इसी
महाविद्या के प्रभाव से किया था। महामुनि श्री
निम्बार्क ने कस्सी ब्राह्मण को इसी विद्या के
प्रभाव से नीम के वृक्ष पर, सूर्यदेव का दर्शन कराया
था। श्री बगलामुखी को “ब्रह्मास्त्र विद्या” के
नामे से भी जाना जाता है। शत्रुओं का दमन और
विघ्नों का शमन करने में विश्व में इनके समकक्ष कोई
अन्य देवता नहीं है।

22/03/2015
Jay mata ji
13/03/2015

Jay mata ji

एक बात बोलू इंकार मत करना आपको आप जिसे चाहते हे उनकी कसम हे। शिव जी 5 नाम  1"शिव शंकर 2"भोले नाथ 3"नील कंठ 4"महारुद्र5"म...
17/02/2015

एक बात बोलू इंकार मत करना आपको आप जिसे चाहते हे उनकी कसम हे। शिव जी 5 नाम
1"शिव शंकर
2"भोले नाथ
3"नील कंठ
4"महारुद्र
5"मृत्युंजय
10 लोगोको सेंड करो पर मुझे नहीं ।आज आपको गुड न्यूज़ मिलेगी,अगर पढ़कर अंजन बने रहे तो शानिवार तक कुछ ऐसा होगा जो कभी सोचा भी नहीं ।
I am very sorry
मे मझबूर हू मुझे किसे नै कहा है ऐसा करने से अपनी मनोकामना पूरी हो जाती है
aur
vese bhi whtsaap free hai aage bhej dijiye
भगवान शिव के 108 नाम ----
१- ॐ भोलेनाथ नमः
२-ॐ कैलाश पति नमः
३-ॐ भूतनाथ नमः
४-ॐ नंदराज नमः
५-ॐ नन्दी की सवारी नमः
६-ॐ ज्योतिलिंग नमः
७-ॐ महाकाल नमः
८-ॐ रुद्रनाथ नमः
९-ॐ भीमशंकर नमः
१०-ॐ नटराज नमः
११-ॐ प्रलेयन्कार नमः
१२-ॐ चंद्रमोली नमः
१३-ॐ डमरूधारी नमः
१४-ॐ चंद्रधारी नमः
१५-ॐ मलिकार्जुन नमः
१६-ॐ भीमेश्वर नमः
१७-ॐ विषधारी नमः
१८-ॐ बम भोले नमः
१९-ॐ ओंकार स्वामी नमः
२०-ॐ ओंकारेश्वर नमः
२१-ॐ शंकर त्रिशूलधारी नमः
२२-ॐ विश्वनाथ नमः
२३-ॐ अनादिदेव नमः
२४-ॐ उमापति नमः
२५-ॐ गोरापति नमः
२६-ॐ गणपिता नमः
२७-ॐ भोले बाबा नमः
२८-ॐ शिवजी नमः
२९-ॐ शम्भु नमः
३०-ॐ नीलकंठ नमः
३१-ॐ महाकालेश्वर नमः
३२-ॐ त्रिपुरारी नमः
३३-ॐ त्रिलोकनाथ नमः
३४-ॐ त्रिनेत्रधारी नमः
३५-ॐ बर्फानी बाबा नमः
३६-ॐ जगतपिता नमः
३७-ॐ मृत्युन्जन नमः
३८-ॐ नागधारी नमः
३९- ॐ रामेश्वर नमः
४०-ॐ लंकेश्वर नमः
४१-ॐ अमरनाथ नमः
४२-ॐ केदारनाथ नमः
४३-ॐ मंगलेश्वर नमः
४४-ॐ अर्धनारीश्वर नमः
४५-ॐ नागार्जुन नमः
४६-ॐ जटाधारी नमः
४७-ॐ नीलेश्वर नमः
४८-ॐ गलसर्पमाला नमः
४९- ॐ दीनानाथ नमः
५०-ॐ सोमनाथ नमः
५१-ॐ जोगी नमः
५२-ॐ भंडारी बाबा नमः
५३-ॐ बमलेहरी नमः
५४-ॐ गोरीशंकर नमः
५५-ॐ शिवाकांत नमः
५६-ॐ महेश्वराए नमः
५७-ॐ महेश नमः
५८-ॐ ओलोकानाथ नमः
५४-ॐ आदिनाथ नमः
६०-ॐ देवदेवेश्वर नमः
६१-ॐ प्राणनाथ नमः
६२-ॐ शिवम् नमः
६३-ॐ महादानी नमः
६४-ॐ शिवदानी नमः
६५-ॐ संकटहारी नमः
६६-ॐ महेश्वर नमः
६७-ॐ रुंडमालाधारी नमः
६८-ॐ जगपालनकर्ता नमः
६९-ॐ पशुपति नमः
७०-ॐ संगमेश्वर नमः
७१-ॐ दक्षेश्वर नमः
७२-ॐ घ्रेनश्वर नमः
७३-ॐ मणिमहेश नमः
७४-ॐ अनादी नमः
७५-ॐ अमर नमः
७६-ॐ आशुतोष महाराज नमः
७७-ॐ विलवकेश्वर नमः
७८-ॐ अचलेश्वर नमः
७९-ॐ अभयंकर नमः
८०-ॐ पातालेश्वर नमः
८१-ॐ धूधेश्वर नमः
८२-ॐ सर्पधारी नमः
८३-ॐ त्रिलोकिनरेश नमः
८४-ॐ हठ योगी नमः
८५-ॐ विश्लेश्वर नमः
८६- ॐ नागाधिराज नमः
८७- ॐ सर्वेश्वर नमः
८८-ॐ उमाकांत नमः
८९-ॐ बाबा चंद्रेश्वर नमः
९०-ॐ त्रिकालदर्शी नमः
९१-ॐ त्रिलोकी स्वामी नमः
९२-ॐ महादेव नमः
९३-ॐ गढ़शंकर नमः
९४-ॐ मुक्तेश्वर नमः
९५-ॐ नटेषर नमः
९६-ॐ गिरजापति नमः
९७- ॐ भद्रेश्वर नमः
९८-ॐ त्रिपुनाशक नमः
९९-ॐ निर्जेश्वर नमः
१०० -ॐ किरातेश्वर नमः
१०१-ॐ जागेश्वर नमः
१०२-ॐ अबधूतपति नमः
१०३ -ॐ भीलपति नमः
१०४-ॐ जितनाथ नमः
१०५-ॐ वृषेश्वर नमः
१०६-ॐ भूतेश्वर नमः
१०७-ॐ बैजूनाथ नमः
१०८-ॐ नागेश्वर नमः
यह भगवान के १०८ नाम केवल ११ लोगों को भेजो ज़रूर शुभ समाचार मिलेगा ।

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