11/08/2026
हम दुनिया में आने की तारीख़ नहीं जानते थे ,और जाने की तारीख़ भी नहीं जानते।
लेकिन इतना ज़रूर जानते हैं कि एक दिन हमें Allah ﷻ के सामने अकेले खड़ा होना है।
उस दिन न हमारा मोबाइल हमारे साथ होगा,
न हमारी शोहरत,
न हमारा बैंक बैलेंस,
न हमारे दोस्त…
हमारे साथ सिर्फ़ हमारे आमाल होंगे।
Allah ﷻ फ़रमाता है:
«وَلَقَدْ جِئْتُمُونَا فُرَادَىٰ كَمَا خَلَقْنَاكُمْ أَوَّلَ مَرَّةٍ»
“और तुम हमारे पास अकेले आए होगे, जैसे हमने तुम्हें पहली बार पैदा किया था।”
(सूरह अल-अनआम 6:94)
ज़रा इस आयत को अपने दिल में उतारकर देखिए…
जिस दुनिया को हम इतना बड़ा समझते हैं,
एक दिन उसे पीछे छोड़कर जाना होगा।
जिस चीज़ के लिए हम आज परेशान हैं,
हो सकता है कल वह हमारे लिए बिल्कुल मायने न रखे।
लेकिन एक नमाज़…
एक सच्ची तौबा…
एक छुपा हुआ सदक़ा…
माँ-बाप के साथ किया हुआ अच्छा बर्ताव…
किसी दुखी इंसान को दिया हुआ सहारा…
ये सब हमारे लिए उस दिन बहुत क़ीमती हो सकते हैं।
Prophet Muhammad ﷺ ने फ़रमाया:
“मय्यित के साथ तीन चीज़ें जाती हैं: उसके घर वाले, उसका माल और उसका अमल। दो वापस लौट आते हैं और एक उसके साथ रह जाता है। उसके घर वाले और उसका माल वापस लौट आते हैं, और उसका अमल उसके साथ रह जाता है।”
(सहीह अल-बुख़ारी 6514; सहीह मुस्लिम 2960)
इसलिए अपने आमाल को छोटा मत समझिए।
हो सकता है आपकी वह एक नमाज़,
जिसे आपने मुश्किल के बावजूद पढ़ा…
वही आपके लिए रहमत का सबब बन जाए।
हो सकता है आपकी वह एक तौबा,
जिसे आपने रोते हुए की…
वही आपकी ज़िंदगी बदल दे।
हो सकता है किसी के लिए किया गया वह छोटा सा एहसान,
जिसे आपने भूल भी गए…
Allah ﷻ के यहाँ वह बहुत बड़ा हो।
आख़िरत की तैयारी का मतलब दुनिया छोड़ देना नहीं है।
बल्कि दुनिया में रहते हुए यह याद रखना है कि:
हम यहाँ हमेशा रहने के लिए नहीं आए।
आज अपने दिल से पूछिए:
अगर आज मेरा आख़िरी दिन हो, तो क्या मेरे आमाल मुझे सुकून देंगे या पछतावा?
अगर जवाब अच्छा नहीं है, तो अभी भी देर नहीं हुई।
साँस चल रही है तो तौबा का दरवाज़ा खुला है।
वक़्त मिला है तो अमल का मौक़ा मिला है।
आज से शुरुआत कीजिए।
एक नमाज़ बेहतर कीजिए।
एक गुनाह छोड़िए।
एक रिश्ता ठीक कीजिए।
एक नेक काम छुपकर कीजिए।
क्योंकि एक दिन हमारी कहानी दुनिया में खत्म हो जाएगी…
लेकिन हमारे आमाल की कहानी आख़िरत में जारी रहेगी।
🤲 आज का अमल:
आज रात सोने से पहले अपने दिन का हिसाब कीजिए और Allah ﷻ से सच्ची तौबा करके सोइए।
अगर यह बात आपके दिल को छू गई हो, तो इसे किसी ऐसे शख़्स तक पहुँचा दीजिए जिसे आख़िरत की यह याद आज ज़रूरत है।
— Rashid Iqbal | Islamic Scholar
Sharing authentic Islamic knowledge. Inspiring hearts to connect with Allah ﷻ.
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