21/04/2026
“बच्चे स्कूल से सिर्फ किताबें नहीं लाते… आदतें, सोच और भविष्य भी लेकर आते हैं।”
हर माता-पिता चाहते हैं कि उनका बच्चा सफल बने, आगे बढ़े, सम्मान पाए।
लेकिन सच ये है कि सिर्फ स्कूल भेज देने से भविष्य नहीं बनता…
भविष्य बनता है घर के माहौल, माता-पिता के व्यवहार और रोज़ के छोटे प्रयासों से।
अगर आप रोज़ सिर्फ 5 मिनट बच्चे के साथ बैठ जाएँ…
पूछ लें कि आज क्या सीखा…
उसकी कॉपी देख लें…
उसकी बात ध्यान से सुन लें…
तो बच्चा सिर्फ पढ़ाई में नहीं, आत्मविश्वास में भी आगे बढ़ता है।
बच्चे डाँट से नहीं, संवाद से बदलते हैं।
तुलना से नहीं, भरोसे से बढ़ते हैं।
और मोबाइल देकर चुप कराने से नहीं, समय देकर निखरते हैं।
आज के समय में सबसे बड़ी कमी पैसों की नहीं…
माता-पिता के समय की है।
महंगे स्कूल, बड़ी फीस, कोचिंग सब बाद में आते हैं…
पहली पाठशाला आज भी घर ही है।
अगर घर साथ दे दे…
तो साधारण बच्चा भी असाधारण बन सकता है।
याद रखिए…
बच्चों को खिलौने याद नहीं रहते,
लेकिन माता-पिता का साथ जिंदगी भर याद रहता है।
“रोज़ 5 मिनट दीजिए… कल आपका बच्चा आपको गर्व के घंटे देगा।”
आज बच्चे से पूछिए – बेटा/बेटी, आज नया क्या सीखा?
शिशु भारती स्कूल तकिया रसलपुर गया जी
निर्देशक ~योगेंद्र सर
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